सोचिए, हमारे ब्रह्मांड के नियम, जैसे प्रकाश की गति या गुरुत्वाकर्षण का स्थिरांक बिल्कुल सटीक हैं । अगर इनमें एक बिंदु का भी बदलाव हो जाए, तो जीवन का अस्तित्व ही खत्म हो जाए । क्या यह अचूक सटीकता महज़ एक इत्तेफाक है, या फिर बैकएंड में चल रही किसी सुप्रीम कोडिंग का नतीजा है ?
1 द सिमुलेशन हाइपोथिसिस (गेम की तरह समझ सकते हैं, जहां गेम के किरदारों को पता ही नहीं होता कि वे एक कोडिंग का हिस्सा हैं )।
विज्ञान इस पर सोचने से कतराता नहीं है, बल्कि आधुनिक विज्ञान की एक शाखा इस पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसे सिमुलेशन थ्योरी कहा जाता है ।
ब्रह्मांड की गणितीय भाषा ।
महान वैज्ञानिक गैलीलियो ने कहा था, ब्रह्मांड एक किताब है जिसे गणित की भाषा में लिखा गया है । आज के युग में हम कह सकते हैं कि ब्रह्मांड की भाषा बाइनरी कोड (0 और 1) या क्वांटम कोड हो सकती है ।
प्रोग्रामर कौन है ?
यदि यह ब्रह्मांड एक सॉफ्टवेयर है, तो इसे बनाने वाला (परमात्मा) कोई पारंपरिक मूर्ति या व्यक्ति नहीं, बल्कि एक परम चेतना या सुपर-प्रोग्रामर है । वह इस सिस्टम (ब्रह्मांड) के नियमों को लिखकर इससे बाहर बैठ कर इसे देख रहा है । जैसे कोई कोडर गेम बनाने के बाद गेम के अंदर नहीं रहता, बल्कि बाहर से उसे कंट्रोल करता है ।
2 ब्लॉगर के मालिक (Google) की सोच से इसका कनेक्शन
गूगल का दृष्टिकोण (एल्गोरिदम और निर्माता) गूगल खुद को इंटरनेट का विधाता या आर्किटेक्ट मानता है । गूगल की सोच हमेशा यही रही है कि नियम (एल्गोरिदम) बनाओ और सिस्टम को अपने आप चलने दो ।
सृष्टि और गूगल सर्च में समानता ।
गूगल ने एक बार सर्च एल्गोरिदम बना दिया, अब अरबों लोग रोज़ सर्च करते हैं, लेकिन गूगल का मालिक हर व्यक्ति के सर्च को खुद बैठकर हैंडल नहीं करता । एल्गोरिदम अपने आप काम करता है । ठीक इसी तरह, परमात्मा ने कर्म का नियम और प्रकृति के नियम (जैसे गुरुत्वाकर्षण) का कोड लिख दिया है । अब यह ब्रह्मांड खुद-ब-खुद चल रहा है ।
3 क्या ईश्वर इस ब्रह्मांड का मुख्य प्रोग्रामर है ?
जैसे कोडिंग से बनी वेबसाइट कभी मैली नहीं होती, वैसे ही परमात्मा कभी अशुद्ध नहीं होते ।
डिजिटल आत्मा ।
आज का इंसान जिसे सॉफ्टवेयर या डेटा कहता है, हज़ारों साल पहले हमारे वेदों ने उसे आत्मा कहा था जो न कट सकती है, न जल सकती है और न ही मैली हो सकती है । डेटा भी अमर है, उसे बस एक हार्डड्राइव से दूसरी हार्डड्राइव (यानी एक शरीर से दूसरे शरीर) में ट्रांसफर किया जा सकता है ।
4 गणित पर आधारित ब्रह्मांड ।
हमारे ब्रह्मांड के सारे नियम (जैसे गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश की गति आदि) गणितीय समीकरणों पर चलते हैं । भौतिक विज्ञानी जब ब्रह्मांड की गहराई में जाते हैं, तो उन्हें हर जगह कोड जैसा पैटर्न दिखता है ।
5 महान लेखक का मौन ।
वैज्ञानिक अक्सर वहां रुक जाते हैं जहां गणित की सीमाएं खत्म होती हैं । लेकिन ब्लॉगर के मालिक (टेक माइंडसेट) और अध्यात्म की सोच यहाँ आकर मिलती है कि यह संसार कोई इत्तेफाक नहीं है, यह एक बेहद जटिल और खूबसूरत कोडिंग का नतीजा है ।
निष्कर्ष ।
विज्ञान भले ही बनाने वाले को न ढूंढ पाया हो, लेकिन वह बनाने वाले के कोड (DNA, फिबोनाची सीरीज़, क्वांटम फिजिक्स) को हर दिन डिकोड कर रहा है । ईश्वर सबसे बड़ा कोडर है, और हम सब उसकी वेबसाइट (संसार) के छोटे-छोटे यूज़र्स हैं ।
जैसे सॉफ्टवेयर का कोड कभी पुराना या मैला नहीं होता, वैसे ही ब्रह्मांड के नियम भी अमर हैं । और क्या सच में इसका कोई मास्टर डेवलपर मौजूद है ? अपने विचार कमेंट्स में बताएं ।

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