अक्सर कहा जाता है कि सत्य के मार्ग पर भीड़ नहीं होती । लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि इस मार्ग पर अकेले चलने वाले *सत्य पुरुष* को रोकने के लिए, उसे भटकाने के लिए, समाज में कुतर्कों की एक बहुत बड़ी फौज हमेशा तैयार खड़ी रहती है ।
जब कोई इंसान अपनी आत्मा की आवाज सुनकर धर्म और सत्य के मार्ग पर अडिग रहता है, तो उसे गिराने के लिए लोग लाठी-डंडे लेकर नहीं आते वे आते हैं मानसिकता के खेल और तर्कों के साथ ।
1 तर्क की आड़ में कुतर्क का हमला ।
जब आप ईमानदारी के रास्ते पर चलेंगे, तो लोग आपको गिराने के लिए ऐसे तर्क देंगे जो दिखने में बहुत प्रैक्टिकल लगेंगे ।
- इतने ईमानदार बनोगे तो भूखे मर जाओगे ।
- ज़माना बदल गया है, यहाँ हरिश्चंद्र बनने से घर नहीं चलता ।
- तुम्हारी अच्छाई का लोग फायदा उठा रहे हैं ।
- तुम बेवकूफ हो ।
ये तर्क वास्तव में तर्क नहीं, बल्कि मानसिक जाल हैं । ये बातें वो लोग करते हैं जो खुद सत्य पर चलने का साहस खो चुके हैं और दूसरों को भी अपने जैसा कमजोर देखना चाहते हैं ।
2 सत्य पुरुष की मानसिकता एक सॉफ्टवेयर की तरह अन-हैकबल ।
जैसे एक बेहतरीन कोडिंग से बना सॉफ्टवेयर किसी भी वायरस से प्रभावित नहीं होता, वैसे ही एक सच्चे मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति की मानसिकता होती है ।
*सत्य पुरुष* का संकल्प उस कोड की तरह है जिसे दुनिया का कोई भी कुतर्क हैक नहीं कर सकता ।
उन्हें गिराने के लिए लोग तरह-तरह के लॉजिक के वायरस भेजते हैं, लेकिन *सत्य पुरुष* जानते हैं कि सत्य कभी पुराना या गलत नहीं हो सकता । वह जानते हैं कि जो मार्ग तात्कालिक रूप से कठिन दिख रहा है, अंततः वही शाश्वत है ।
विज्ञान का नियम
विज्ञान कहता है कि हर क्रिया की विपरीत प्रतिक्रिया होती है । जब आप समाज की धारा के विपरीत *सत्य* की ओर बढ़ते हैं, तो समाज का घर्षण आपको रोकने की कोशिश करेगा ही । यह प्रकृति का नियम है ।
अध्यात्म का नियम
गीता में भी कहा गया है कि धर्म के मार्ग पर चलने वाले को पहले संशय और उपहास का सामना करना पड़ता है । लेकिन जो इन तर्कों से विचलित नहीं होता, वही अपनी मंजिल तक पहुँचता है ।
4 ब्लॉगर के मालिक की सोच से इसकी तुलना ।
गूगल के एल्गोरिदम को देखिए रोजाना लाखों लोग स्पैम वेबसाइट्स बनाते हैं, फेक कंटेंट डालते हैं, और गूगल को धोखा देने की कोशिश करते हैं । लेकिन गूगल का मूल एल्गोरिदम (*सत्य*) अपनी राह नहीं छोड़ता । वह अंततः स्पैम (कुतर्क) को फिल्टर करके बाहर फेंक देता है और जो वेबसाइट असली और सच्ची होती है, उसे ही नंबर वन पर लाता है ।
ठीक इसी तरह, ब्रह्मांड का जो *मास्टर प्रोग्रामर* है, उसने भी एक फिल्टर लगा रखा है । लोग आपको गिराने के लिए कितने भी तर्क दें, यदि आप अपनी जगह सही हैं, तो ब्रह्मांड का एल्गोरिदम देर-सवेर आपको सबसे ऊपर लेकर आएगा ।
5 गिराने वालों की मनोवैज्ञानिक रणनीति (गैसलाइटिंग) ।
जब लोग एक *सत्य पुरुष* को शारीरिक या कानूनी रूप से नहीं हरा पाते, तो वे मनोवैज्ञानिक युद्ध का सहारा लेते हैं । इसे आज की भाषा में गैसलाइटिंग कहते हैं ।
संदेह का बीज बोना ।
वे आपके सामने ऐसे सवाल खड़े करेंगे कि आप खुद अपनी नीयत पर शक करने लगेंगे । वे कहेंगे, तुम जो कर रहे हो, वो सिर्फ तुम्हारा अहंकार है, कोई भलाई नहीं ।
अकेलापन का अहसास कराना ।
वे एक ऐसा माहौल बना देंगे जैसे पूरी दुनिया एक तरफ है और आप अकेले मूर्ख हैं जो इस रास्ते पर चल रहे हैं ।
कुतर्क करने वालों का उद्देश्य आपको सुधारना नहीं, बल्कि आपकी उस मानसिक शांति को छीनना होता है जो उन्हें अपने भ्रष्ट रास्ते पर कभी नसीब नहीं हुई ।
6 इतिहास गवाह है ।
हर *सत्य पुरुष* को इस कोडिंग से गुजरना पड़ा ।
इस ब्रह्मांड के इतिहास में जब-जब कोई *सत्य पुरुष* अपने मार्ग पर आगे बढ़ा, समाज के तथाकथित बुद्धिजीवियों ने उसे अपने तर्कों से गिराने की कोशिश की ।
सुकरात ।
जब वे एथेंस के युवाओं को सत्य और तर्क की राह दिखा रहे थे, तो वहाँ के समाज ने उन पर युवाओं को भटकाने का कुतर्क मढ़ा और उन्हें ज़हर पीने पर मजबूर कर दिया । आज ज़हर देने वालों का नाम कोई नहीं जानता, लेकिन सुकरात का विचार अमर है ।
संत कबीर ।
कबीर ने जब पाखंड के खिलाफ सच बोलना शुरू किया, तो पंडितों और मौलवियों दोनों ने अपने-अपने शास्त्रों के तर्क देकर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की । लेकिन कबीर का साखी और सबद आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रहा है ।
*सत्य पुरुष* जानते हैं कि तर्क केवल बुद्धि की कसरत है, जबकि *सत्य आत्मा की अवस्था* है । बुद्धि को भ्रमित किया जा सकता है, आत्मा को नहीं ।
7 डिजिटल युग का ट्रॉलिंग कल्चर और सत्य पुरुष ।
आज के दौर में यह चीज़ और आसान हो गई है । अगर आप सोशल मीडिया या इंटरनेट पर कोई अच्छी, सच्ची या धार्मिक बात लिखेंगे, तो तुरंत नीचे कमेंट बॉक्स में तार्किक बनने वाले लोग मीम्स अपशब्द, कुतर्क लेकर आ जाएंगे या देखना भी पसंद नहीं करेंगे ।
•वे आपकी बात का अनर्थ निकालेंगे ।
•वे आपकी नीयत पर सवाल उठाएंगे ।
•वे आपकी नीयत पर सवाल उठाएंगे ।
सत्य पुरुष का डिजिटल जवाब ।
जैसे एक समझदार कंप्यूटर यूजर इंटरनेट पर आने वाले हर फालतू पॉप-अप या विज्ञापन पर क्लिक नहीं करता, बल्कि उसे *क्रॉस* (X) करके आगे बढ़ जाता है, वैसे ही सत्य पुरुष इन कुतर्कों को ब्लॉक कर देता है । वह जानता है कि हर भौंकने वाले पर पत्थर फेंकने से उसकी खुद की यात्रा धीमी हो जाएगी ।

8 ब्रह्मांड के ग्रेविटी नियम को समझें ।
भौतिक विज्ञान में एक नियम है, आप जितना ऊँचा उठने की कोशिश करेंगे, पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति आपको उतनी ही तेज़ी से नीचे खींचेगी ।
आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में भी यही नियम लागू होता है । जब आप साधारण बनकर कीचड़ में पड़े रहते हैं, तो कोई आपको परेशान नहीं करता । लेकिन जैसे ही आप नैतिक रूप से, चरित्र के रूप में ऊँचा उठने लगते हैं, समाज की मानसिक ग्रेविटी आपको नीचे खींचने के लिए सक्रिय हो जाती है ।
यदि लोग आपको नीचे गिराने के लिए बहुत सारे तर्कों का जाल बुन रहे हैं, तो समझ जाइए कि आप उनसे बहुत ऊँचे उठ चुके हैं । नीचे गिराया उसी को जाता है जो ऊपर होता है ।
आपकी सुरक्षा का फायरवॉल क्या है ?
इस मानसिक युद्ध से बचने का केवल एक ही तरीका है, मौन और निरंतरता ।
तर्क करने वालों से बहस मत कीजिए । क्योंकि कुतर्क एक ऐसा दलदल है, आप उसमें जितना उलझेंगे, उतने ही धंसते जाएंगे । भगवान बुद्ध के सामने जब कोई गाली देने या बहस करने आता था, तो वे शांत रहते थे । उनका मानना था कि यदि आप किसी का दिया हुआ उपहार स्वीकार नहीं करते, तो वह उपहार देने वाले के पास ही रह जाता है ।
निष्कर्ष-*सत्य पुरुष* के लिए एक संदेश ।
यदि आप भी अपने जीवन में किसी सच्चे मार्ग पर चल रहे हैं और लोग आपको अपनी *व्यावहारिक* बातों से डरा रहे हैं या गिराने की कोशिश कर रहे हैं, तो मुस्कुराइए । याद रखिए, सोनार की दुकान पर कभी भीड़ नहीं होती, भीड़ हमेशा नकली सामान बेचने वालों के यहाँ होती है ।
तर्कों को अपनी आत्मा की शुद्धता पर हावी न होने दें । आपका *सत्य* ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है ।
अपने ब्लॉग के पाठकों से मैं यही कहूँगा, यदि आप सच्चे हैं, तो अपनी राह मत बदलिए । आपके मार्ग का कोड खुद उस परम प्रोग्रामर (*परमात्मा*) ने लिखा है । दुनिया की कोई भी ताकत इस कोड को करप्ट नहीं कर सकती । चलते रहिए, जीत अंततः सत्य की ही होगी ।


0 Comments