तर्कशास्त्र (Logic) वह विज्ञान और कला है जो हमें सही और गलत सोचने के तरीके में अंतर करना सिखाती है। सीधे शब्दों में कहें, तो यह सोचने का व्याकरण (Grammar of Thinking) है।
जैसे व्याकरण हमें सही बोलना सिखाता है, वैसे ही तर्कशास्त्र हमें सही ढंग से निष्कर्ष निकालना सिखाता है ।
भारतीय और पाश्चात्य (Western) दोनों ही दर्शनों में तर्कशास्त्र का बहुत गहरा और समृद्ध इतिहास रहा है । आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं । 
तर्कशास्त्र के मुख्य स्तंभ (Core Pillars)
तर्कशास्त्र मुख्य रूप से तीन चीजों पर काम करता है।
आधार वाक्य (Premise)
वह जानकारी या तथ्य जो हमारे पास पहले से है।
युक्ति (Argument)
उन तथ्यों को आपस में जोड़ने का तरीका।
निष्कर्ष (Conclusion)
तथ्यों को जोड़ने के बाद जो अंतिम परिणाम या सच निकलकर आता है।
एक छोटा सा उदाहरण ।
तथ्य 1 सभी इंसानों को एक दिन मरना है।
तथ्य 2 सोहन एक इंसान है।
निष्कर्ष इसलिए, सोहन को भी (100 वर्ष) आयु होने पर एक दिन मरना है।
यदि आपके आधार वाक्य (Facts) सही हैं और उन्हें जोड़ने का तरीका सही है, तो निष्कर्ष हमेशा सत्य होगा।
भारतीय दर्शन में तर्कशास्त्र, न्याय दर्शन ।
भारत में तर्कशास्त्र को अन्वीक्षिकी या न्याय शास्त्र कहा गया है, जिसकी स्थापना महर्षि गौतम ने की थी ।
भारतीय तर्कशास्त्र सिर्फ दिमागी कसरत नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सत्य को जानकर अज्ञानता को दूर करना है ।
न्याय दर्शन के अनुसार किसी भी ज्ञान को सच मानने के लिए चार प्रमाण (Proofs) जरूरी हैं ।
प्रत्यक्ष (Perception)
जो हमें आँखों से दिखाई दे या इंद्रियों से महसूस हो (जैसे- सामने आग जल रही है)।
अनुमान (Inference)
धुएँ को देखकर आग का अंदाजा लगाना। इसमें तीन चीजें होती हैं साध्य (जो सिद्ध करना है जैसे आग) हेतु (जिस लक्षण से सिद्ध करना है जैसे धुआँ) और पक्ष (जहाँ सिद्ध करना है जैसे पर्वत) ।
उपमान (Comparison)
किसी जानी-पहचानी चीज़ से तुलना करके नई चीज़ को समझना ।
शब्द (Testimony)
किसी भरोसेमंद व्यक्ति या शास्त्र की बात को सच मानना ।
पाश्चात्य तर्कशास्त्र (Western Logic)
पश्चिम में तर्कशास्त्र की शुरुआत महान दार्शनिक अरस्तू (Aristotle) से मानी जाती है । इसमें मुख्य रूप से दो तरीके अपनाए जाते हैं ।
निगमन तर्क (Deductive Logic)
सामान्य नियम से किसी विशेष सच की ओर जाना । (जैसे ऊपर दिया गया सोहन वाला उदाहरण । इसमें अगर नियम सही है तो नतीजा १००% सही होगा) ।
आगमन तर्क (Inductive Logic)
कई छोटे-छोटे अनुभवों को जोड़कर एक सामान्य नियम बनाना । (जैसे मैंने पहला कौआ काला देखा, दूसरा भी काला देखा, तीसरा भी काला देखा इसलिए दुनिया के सारे कौए काले होते हैं । इसमें निष्कर्ष की संभावना होती है, लेकिन यह १००% निश्चित नहीं होता) । क्योंकि कभी-कभी काला भी आधा सफेद और आधा काला हो जाता है या भूरा हो जाता है ।
तर्कशास्त्र क्यों जरूरी है ? (What makes it important?)
भ्रम और अंधविश्वास से बचाव यह हमें सिखाता है कि किसी की भी बात पर आँख मूँदकर भरोसा करने के बजाय उसके पीछे का कारण या ठोस सबूत माँगें ।
कुतर्क (Fallacy) को पहचानना कई बार लोग अपनी बात मनवाने के लिए गलत या घुमावदार दलीलें देते हैं । तर्कशास्त्र आपको उन कमियों (भासाभास या Fallacies) को तुरंत पकड़ना सिखा देता है ।
निर्णय लेने की क्षमता व्यापार, जीवन, या किसी भी उलझन में सही और व्यावहारिक फैसला लेने में मदद करता है ।
गहन चर्चा यह आपकी बातचीत को बहस (Argument) से ऊपर उठाकर संवाद (Dialogue) और सत्य की खोज में बदल देता है ।
लॉजिक या तर्कशास्त्र का अंतिम लक्ष्य केवल वाद-विवाद में जीतना नहीं है बल्कि जो जैसा है उसे वैसा ही देखना और समझना है । बिना किसी पूर्वाग्रह या व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के ।
क्या आप तर्कशास्त्र के किसी खास हिस्से (जैसे अनुमान के नियम या रोजमर्रा की जिंदगी में गलत तर्कों को पकड़ना) के बारे में और गहराई से जानना चाहते हैं ?
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