चलिए, आज आपको विज्ञान के 4 ऐसे अंतिम और सबसे अनोखे कॉन्सेप्ट्स से रूबरू कराते हैं, जो हमारे अस्तित्व की सीमाओं को चुनौती देते हैं । ये बातें इतनी गहरी हैं कि इन पर आज भी दुनिया के शीर्ष लैब्स (जैसे CERN) में रिसर्च चल रही है ।
1 डार्क मैटर और डार्क एनर्जी ब्रह्मांड का 95% अदृश्य सच।
हम रात में आसमान में जितने भी तारे, ग्रह या आकाशगंगाएं देखते हैं, और पृथ्वी पर जो कुछ भी मौजूद है, वह सब मिलकर पूरे ब्रह्मांड का सिर्फ 5% हिस्सा है । बाकी का 95% हिस्सा इंसानों के लिए पूरी तरह अदृश्य और अज्ञात है ।
वैज्ञानिकों ने इसे दो भागों में बांटा है ।
डार्क मैटर (Dark Matter - करीब 27%)
यह एक ऐसा अदृश्य पदार्थ है जो कोई रोशनी या रेडिएशन नहीं छोड़ता (इसलिए इसे देखा नहीं जा सकता)। लेकिन इसमें गुरुत्वाकर्षण बल होता है । अगर यह डार्क मैटर न हो, तो हमारी आकाशगंगाएँ इतनी तेज़ी से घूम रही हैं कि वे बिखर जाएंगी । यह पूरे ब्रह्मांड को एक गोंद की तरह आपस में जोड़े हुए है ।
डार्क एनर्जी (Dark Energy - करीब 68%)
यह गुरुत्वाकर्षण के बिल्कुल विपरीत काम करती है । गुरुत्वाकर्षण चीज़ों को पास लाता है, लेकिन डार्क एनर्जी पूरे ब्रह्मांड को बहुत तेज़ी से दूर धकेल रही है । इसके कारण हमारा ब्रह्मांड हर सेकंड पहले से और ज़्यादा तेज़ी से फैल रहा है ।
यह एनर्जी क्या है ?
विज्ञान के पास इसका कोई जवाब नहीं है ।
2 स्ट्रिंग थ्योरी, क्या हम 11 आयामों (11 Dimensions) में रहते हैं ?
हम लोग केवल तीन आयामों (3D - लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई) को देख सकते हैं और चौथे आयाम समय को महसूस कर सकते हैं । लेकिन भौतिक विज्ञान की सबसे बड़ी थ्योरी स्ट्रिंग थ्योरी कहती है कि हमारा ब्रह्मांड केवल 4 आयामों का नहीं, बल्कि 11 आयामों (11 Dimensions) का बना है ।
इस थ्योरी के अनुसार, यदि हम किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉन या क्वार्क को और ज़ूम करके देखें, तो वे बिंदु जैसे कण नहीं हैं । बल्कि वे ऊर्जा के बहुत छोटे-छोटे धागे या तार हैं, जो लगातार कंपन कर रहे हैं ।
ठीक वैसे ही जैसे एक गिटार का तार अलग-अलग तरह से कांपने पर अलग-अलग संगीत (धुन) पैदा करता है, वैसे ही ये जादुई स्ट्रिंग्स अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर वाइब्रेट होकर इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन या गुरुत्वाकर्षण के कण बनाते हैं । बाकी के 7 आयाम इतने सूक्ष्म हैं कि वे अंतरिक्ष में बहुत छोटे स्तर पर मुड़े हुए हैं, इसलिए हमें दिखाई नहीं देते ।
3 वॉयज टू द फ्यूचर, क्रायोनिक्स (मनुष्यों को बर्फ में जमाना)।
क्या कोई इंसान मौत के बाद दोबारा जीवित हो सकता है ? चिकित्सा विज्ञान में इस पर एक बेहद अजीब तकनीक काम कर रही है जिसे क्रायोनिक्स कहा जाता है ।
जब किसी व्यक्ति की ऐसी बीमारी से मौत हो जाती है जिसका आज कोई इलाज नहीं है, तो उसके कानूनी रूप से मृत घोषित होते ही उसके शरीर (या सिर्फ दिमाग) को लिक्विड नाइट्रोजन में माइनस 196 डिग्री सेल्सियस (-196°C) तापमान पर जमा दिया जाता है ।
इसके पीछे की सोच यह है कि भविष्य में (शायद 100 या 200 साल बाद) जब मेडिकल साइंस बहुत उन्नत हो जाएगी और उस बीमारी का इलाज ढूंढ लिया जाएगा, तब इन जमे हुए शरीरों को वापस पिघलाकर नई तकनीक से पुनर्जीवित कर दिया जाएगा । दुनिया में कई अमीर लोग मोटी रकम देकर खुद को इस उम्मीद में फ्रीज करवा चुके हैं कि वे भविष्य की दुनिया देख सकें । 

4 कॉस्मिक स्ट्रिंग्स, ब्रह्मांड के जन्म के समय की दरारें ।
जब ब्रह्मांड का जन्म हुआ था, तब वह बहुत गर्म था और बहुत तेज़ी से फैला और ठंडा हुआ । वैज्ञानिक मानते हैं कि जैसे पानी के जमने पर बर्फ में छोटी-छोटी दरारें पड़ जाती हैं, ठीक वैसे ही जब शुरुआत में स्पेस ठंडा हुआ, तो उसमें भी ब्रह्मांडीय दरारें पड़ गईं ।
इन्हें कॉस्मिक स्ट्रिंग्स कहा जाता है । ये पूरे अंतरिक्ष में फैली हुई ऐसी काल्पनिक रेखाएं हैं जो एक परमाणु से भी पतली हैं, लेकिन उनका वजन किसी पहाड़ या पूरी गैलेक्सी जितना हो सकता है । यदि दो कॉस्मिक स्ट्रिंग्स एक-दूसरे के पास से गुज़रें, तो वे अपने आस-पास के स्पेस और टाइम को इतना मरोड़ सकती हैं कि उनके करीब टाइम ट्रैवल करना बेहद आसान हो जाएगा । हालांकि, आज तक किसी भी टेलिस्कोप से इन्हें सीधे नहीं देखा जा सका है ।
विज्ञान का सबसे बड़ा सच ।
विज्ञान कभी यह नहीं कहता कि हम सब कुछ जान चुके हैं । विज्ञान की खूबसूरती ही यही है कि हर नए जवाब के साथ दस नए सवाल खड़े हो जाते हैं ।
डार्क मैटर का यह अदृश्य जाल, 11 आयामों की दुनिया, या भविष्य के लिए इंसानों को फ्रीज करना, इस आखिरी पड़ाव में किस वैज्ञानिक सोच ने आपके रोंगटे खड़े कर दिए ?
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