जानिए एंटीमैटर (Antimatter) और टाइम ट्रैवल (Time Travel) के पीछे का असली विज्ञान । क्या आइंस्टीन की थ्योरी और वॉर्महोल के ज़रिए समय यात्रा संभव है ? विज्ञान के इन अनसुलझे रहस्यों को बेहद आसान भाषा में समझें ।
इन दोनों के पीछे का विज्ञान और गणित इतना गहरा है कि यह कल्पना और हकीकत के बीच की दीवार को गिरा देता है ।
एंटीमैटर-प्रकृति की सबसे खतरनाक परछाईं ।
जैसा कि हमने पहले बात की थी, एंटीमैटर साधारण मैटर (पदार्थ) का बिल्कुल उल्टा रूप है । आइए इसके पीछे के विज्ञान को गणित और भौतिकी के नजरिए से समझते हैं ।
खोज कैसे हुई ?
साल 1928 में महान भौतिक विज्ञानी पॉल डिराक एक समीकरण पर काम कर रहे थे जो क्वांटम मैकेनिक्स और आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को एक साथ जोड़ सके । उनके सामने एक गणितीय समस्या आई, जो कुछ इस तरह थी, जैसे गणित में \sqrt{4} (4 का वर्गमूल) के दो जवाब हो सकते हैं, +2 और -2 (क्योंकि -2 \times -2 भी +4 होता है) ।
ठीक वैसे ही, डिराक के ऊर्जा समीकरण के भी दो जवाब निकल रहे थे, एक सकारात्मक ऊर्जा के लिए और दूसरा नकारात्मक ऊर्जा के लिए ।
डिरॉक ने हार मानने के बजाय यह प्रस्ताव रखा कि हमारे ब्रह्मांड में हर कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) का एक मिरर इमेज यानी जुड़वां कण भी होना चाहिए, जिस पर चार्ज बिल्कुल उल्टा हो । कुछ साल बाद वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में पॉज़िट्रॉन (Positron - जो कि एक पॉजिटिव चार्ज वाला इलेक्ट्रॉन है) की खोज की, और डिराक की बात सच साबित हुई ।
E = mc^2 का असली रूप
जब हम किसी परमाणु बम को फोड़ते हैं, तो उसका केवल 0.1% से 1% हिस्सा ही ऊर्जा में बदलता है, बाकी हिस्सा मलबे और रेडिएशन में बिखर जाता है ।
लेकिन जब मैटर और एंटीमैटर आपस में मिलते हैं, तो उसे विज्ञान में पूर्ण विनाश कहते हैं । यहाँ आइंस्टीन का प्रसिद्ध समीकरण E = mc^2 अपने सबसे शुद्ध और 100% रूप में काम करता है । पूरा का पूरा द्रव्यमान (Mass) सीधे शुद्ध ऊर्जा (प्रकाश और गामा किरणों) में बदल जाता है। यही कारण है कि यह ब्रह्मांड की सबसे विनाशकारी और शक्तिशाली प्रतिक्रिया है ।
टाइम ट्रैवल-समय को मोड़ने का गणित ।
क्या समय यात्रा सच में मुमकिन है ? विज्ञान कहता है, हाँ, भविष्य में जाना शत-प्रतिशत मुमकिन है और हम इसे साबित भी कर चुके हैं । लेकिन अतीत में जाना एक बहुत बड़ा सिरदर्द है ।
भविष्य की यात्रा
आइंस्टीन ने बताया था कि समय कोई स्थिर नदी नहीं है, बल्कि यह एक रबर की चादर की तरह है जिसे मोड़ा जा सकता है । समय को धीमा करने के दो तरीके हैं ।
गति
आप जितनी तेज़ गति से यात्रा करेंगे, आपके लिए समय उतना ही धीमा चलेगा। यदि आप प्रकाश की गति (3,00,000 \text{ किमी/सेकंड}) के 99.9% की रफ्तार वाले स्पेसशिप में बैठकर अंतरिक्ष में 5 साल बिताएं, तो जब आप पृथ्वी पर वापस लौटेंगे, तो यहाँ करीब 110 साल बीत चुके होंगे । आपके लिए सिर्फ 5 साल बीते, लेकिन पृथ्वी के लिए एक सदी । आप भविष्य में पहुँच चुके होंगे ।
गुरुत्वाकर्षण
भारी वस्तुएं (जैसे ब्लैक होल) समय के ताने-बाने को खींच देती हैं । यदि आप किसी ब्लैक होल के चक्कर लगाकर वापस आएं, तो भारी गुरुत्वाकर्षण के कारण आपके लिए समय बहुत धीमा हो चुका होगा, और आप पृथ्वी के भविष्य में कदम रखेंगे।
एक असल उदाहरण
हमारे आसमान में तैर रहे GPS सैटेलाइट्स पृथ्वी से दूर होने के कारण कम गुरुत्वाकर्षण में हैं और बहुत तेज़ी से चक्कर काट रहे हैं । उनके लिए समय पृथ्वी के मुकाबले हर दिन 38 माइक्रोसेकंड तेज़ चलता है । अगर वैज्ञानिक उनके कंप्यूटर की घड़ियों को हर दिन रीसेट न करें, तो हमारे फोन का GPS मैप कुछ ही घंटों में कई किलोमीटर गलत रास्ता दिखाने लगेगा ।
अतीत की यात्रा और वॉर्महोल (Wormholes) ।
भविष्य में जाना तो आसान है, लेकिन क्या हम अतीत में जाकर अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं ? यहीं पर विज्ञान उलझ जाता है ।
गणित के अनुसार, यदि हम अंतरिक्ष के दो कोनों को आपस में मोड़कर एक शॉर्टकट सुरंग बना दें, तो उसे वॉर्महोल (Einstein-Rosen Bridge) कहा जाता है । सिद्धांत रूप में, यदि वॉर्महोल के एक सिरे को प्रकाश की गति से घुमाया जाए, तो यह एक टाइम पोर्टल बन सकता है जिससे अतीत में जाया जा सकता है ।
लेकिन यहाँ प्रकृति हमें रोक देती है । अतीत की यात्रा करते ही ग्रैंडफादर पैराडॉक्स (Grandfather Paradox) खड़ा हो जाता है ।
अगर आप अतीत में जाकर अपने दादाजी को तब मार दें जब वे बच्चे थे, तो आपके पिता का जन्म नहीं होगा । अगर आपके पिता नहीं होंगे, तो आप पैदा नहीं होंगे । और अगर आप पैदा ही नहीं हुए, तो अतीत में जाकर दादाजी को किसने मारा ?
इस विरोधाभास के कारण कई वैज्ञानिक, जिनमें स्टीफन हॉकिंग भी शामिल थे, का मानना था कि प्रकृति का कोई न कोई नियम (Conjectures) अतीत की समय यात्रा को हमेशा असंभव बनाए रखेगा ।
एंटीमैटर (Antimatter) क्या है ?
सरल शब्दों में, एंटीमैटर साधारण पदार्थ (Matter) का जुड़वां भाई है, लेकिन एक बड़े बदलाव के साथ-इसका चार्ज (आवेश) बिल्कुल उल्टा होता है ।
बनावट
जहाँ एक सामान्य परमाणु (Atom) में पॉजिटिव प्रोटॉन और नेगेटिव इलेक्ट्रॉन होते हैं, वहीं एंटीमैटर में नेगेटिव प्रोटॉन (Antiproton) और पॉजिटिव इलेक्ट्रॉन (Positron) होते हैं ।
ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य ।
बिग बैंग (Big Bang) के समय पदार्थ और एंटीमैटर बराबर मात्रा में बने थे । लेकिन आज हमारा पूरा ब्रह्मांड सिर्फ पदार्थ से बना है । एंटीमैटर कहाँ गया ? यह विज्ञान का बहुत बड़ा सवाल है ।
ऊर्जा का महास्रोत ।
जब मैटर और एंटीमैटर आपस में मिलते हैं, तो वे एक-दूसरे को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं (Annihilation)। इससे 100% शुद्ध ऊर्जा निकलती है । आइंस्टीन के समीकरण E = mc^2 के अनुसार, मात्र 1 ग्राम एंटीमैटर किसी बड़े शहर को उड़ाने या अंतरिक्ष यान को चालू करने के लिए काफी है ।
एंटीमैटर और टाइम ट्रैवल का आपस में संबंध।
मशहूर भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फेनमैन (Richard Feynman) ने एक क्रांतिकारी विचार दिया था, जिसे गणितीय रूप से सही माना गया,
एक एंटी-पार्टिकल (जैसे पॉज़िट्रॉन) कुछ और नहीं, बल्कि एक सामान्य पार्टिकल (जैसे इलेक्ट्रॉन) ही है जो समय में पीछे (Backward in Time) यात्रा कर रहा है ।
भले ही हम इंसानों को टाइम मशीन में न बिठा सकें, लेकिन क्वांटम स्तर (Quantum Level) पर एंटीमैटर को देखकर ऐसा लगता है जैसे प्रकृति खुद समय के साथ खेल रही हो ।
ये दोनों विषय हमें सिखाते हैं कि हम जिसे नियम समझते हैं, ब्रह्मांड के चरम (Extreme) कोनों पर जाकर वे नियम पूरी तरह बदल जाते हैं ।
एंटीमैटर की यह विनाशकारी ऊर्जा या टाइम ट्रैवल का यह भयंकर गणित, इन दोनों में से किस बात ने आपके सोचने का नजरिया सबसे ज़्यादा बदला ?

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