इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का विज्ञान, रेडियो, टीवी और सैटेलाइट तरंगों का अदृश्य जाल, अध्याय 2

पिछले अध्याय में हमने जाना था कि इस ब्रह्मांड में एक बहुत बड़ा अदृश्य जगत मौजूद है, जिसे हमारी आँखें नहीं देख सकतीं। अब सवाल उठता है कि यह अदृश्य दुनिया आखिर बनी किस चीज़ से है ? विज्ञान की भाषा में इसका जवाब है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Spectrum)।
आज हम मोबाइल, इंटरनेट, टीवी और सैटेलाइट के युग में जी रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी तार के, हवा के ज़रिए वीडियो, आवाज़ और डेटा एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुँच जाते हैं ? आइए इस दूसरे अध्याय में तरंगों (Waves) के इस अद्भुत विज्ञान को बहुत ही सरल शब्दों में समझते हैं।


इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम क्या है ?
सरल शब्दों में कहें तो यह ब्रह्मांड में यात्रा करने वाली ऊर्जा की अलग-अलग फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) की एक पूरी लिस्ट है। इसे आप ऊर्जा का एक विशाल रेडियो समझ सकते हैं, जिसमें अलग-अलग बैंडविड्थ होती हैं।
इस स्पेक्ट्रम में सबसे नीचे आती हैं बहुत शांत और लंबी तरंगें (जैसे रेडियो तरंगें), और सबसे ऊपर आती हैं अत्यधिक शक्तिशाली और तेज़ तरंगें (जैसे एक्स-रे और गामा किरणें)। हमारी आँखों को दिखने वाली रोशनी (Visible Light) इसी विशाल स्पेक्ट्रम के बिल्कुल बीच में एक बहुत छोटा सा हिस्सा है।

रेडियो, टीवी और सैटेलाइट तरंगें कैसे काम करती हैं ?
हवा और अंतरिक्ष में तैरता हुआ यह सूचनाओं का महासागर मुख्य रूप से तीन प्रकार की अदृश्य तरंगों पर काम करता है।

1 रेडियो तरंगें (Radio Waves)।
ये इस स्पेक्ट्रम की सबसे लंबी और कम ऊर्जा वाली तरंगें होती हैं। इनकी लंबाई एक फुटबॉल के मैदान जितनी या उससे भी बड़ी हो सकती है।

० काम करने का तरीका:- जब कोई रेडियो स्टेशन (जैसे FM रेडियो) गाना बजाता है, तो वह उस आवाज़ को इन रेडियो तरंगों में बदल देता है। ये तरंगें हवा में चारों तरफ तैरती हैं। जब आप अपने घर या कार के रेडियो को उस खास फ्रीक्वेंसी पर लाते हैं, तो आपका रेडियो उस तरंग को पकड़कर वापस आवाज़ में बदल देता है।

2 माइक्रोवेव और टीवी सिग्नल (Microwaves & TV Signals)।
ये रेडियो तरंगों से थोड़ी छोटी और अधिक ऊर्जा वाली होती हैं। इनका उपयोग आपके घर के वाई-फाई (Wi-Fi), मोबाइल नेटवर्क और टीवी चैनलों के प्रसारण के लिए होता है। चूंकि इनकी फ्रीक्वेंसी ज़्यादा होती है, इसलिए ये बहुत सारा डेटा (जैसे HD वीडियो और इंटरनेट) एक साथ ले जा सकती हैं।

3 सैटेलाइट फ्रीक्वेंसी (Satellite Waves/Space Waves)।
जब हमें दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने में सिग्नल भेजना होता है, तो ज़मीन के टावर काम नहीं आते, क्योंकि पृथ्वी गोल है। ऐसे में हम अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स का उपयोग करते हैं।

० काम करने का तरीका:- ज़मीन पर बना एक बड़ा स्टेशन (Uplink) बहुत ही शक्तिशाली और उच्च फ्रीक्वेंसी की तरंगों को सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट की तरफ फेंकता है। सैटेलाइट उन तरंगों को रिसीव करती है, उन्हें एम्पलीफाई (सशक्त) करती है और वापस पृथ्वी पर नीचे की तरफ भेज देती है (Downlink)। आपके घर की डिश एंटीना या सेट-टॉप बॉक्स उसी फ्रीक्वेंसी पर सेट होता है, जिससे पलक झपकते ही आपके टीवी पर लाइव मैच दिखने लगता है।

ब्रह्मांड में तैरता सूचनाओं का महासागर।
ज़रा सोचिए, इस वक्त आप जहाँ भी बैठे हैं चाहे अपने कमरे में हों या किसी पार्क में आपके शरीर के आर-पार हज़ारों रेडियो स्टेशन, सैकड़ों टीवी चैनल, दुनिया भर के मोबाइल सिग्नल्स और अंतरिक्ष से आ रही सैटेलाइट की तरंगें लगातार गुज़र रही हैं।
यदि आपके पास एक ऐसा चश्मा आ जाए जो इन तरंगों को देख सके, तो आपको अपना कमरा खाली नहीं, बल्कि रंग-बिरंगी चमकीली रस्सियों और सिग्नल्स के एक बेहद घने जाल जैसा दिखाई देगा। यह पूरा ब्रह्मांड एक विशाल क्लाउड नेटवर्क की तरह है, जहाँ हर जगह जानकारी (Information) तैर रही है।

निष्कर्ष।
इंसानी जुड़ाव की भूमिका
इस अध्याय का सबसे बड़ा वैज्ञानिक सच यह है कि हवा में तरंगे हमेशा मौजूद रहती हैं, लेकिन आप सुन या देख सिर्फ उसी को पाते हैं जिसके लिए आपका डिवाइस ट्यून (Tune) होता है।
यही विज्ञान हमारे जीवन और दिमाग पर भी लागू होता है। ब्रह्मांड में हर तरह के विचार और ऊर्जाएं तैर रही हैं। अगले अध्याय (अध्याय 3) में हम जानेंगे कि हमारा शरीर और हमारा मस्तिष्क किस तरह एक जीवित एंटीना की तरह काम करता है और इन तरंगों को कैसे रिसीव करता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)।
शैक्षणिक और वैज्ञानिक जानकारी के लिए उचित घोषणा
अस्वीकरण:- यह लेख केवल शैक्षणिक, वैज्ञानिक जागरूकता और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत तथ्य भौतिकी और संचार तकनीक के सर्वमान्य सिद्धांतों पर आधारित हैं। लेख का उद्देश्य जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों तक पहुँचाना है।

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