हींग (हींग) के बारे में तो आप जानते ही होंगे। हींग एक मसाला है। हींग का उपयोग सार के रूप में हर घर की रसोई में होता है। दाल के छोंक में हींग से बनाया गया एक शानदार स्वाद, जो दाल का स्वाद तो वही है, साथ ही दाल का सुपाच्य भी बनता है। दाल खाने के बाद पेट में बनने वाली गैस हींग का असर शांत होता है। यह प्रभाव लहसुन भी देता है। जो लोग लहसुन नहीं खाते उन्हें लहसुन के फायदे हींग से मिल सकते हैं। हींग का प्रयोग ना सिर्फ भोजन को स्वादिष्ट बनाता है बल्कि इससे कई दुकानों में भी लाभ मिलता है। इसके अलावा हींग का उपयोग करने के लिए केवल धारकों को ठीक करना भी आवश्यक है।
हींग क्या है? (हिंग क्या है?)
हींग की कई शाखाएं मौजूद हैं। हींग का पौधा (हींग का पौधा/पेड़) 1.5-2.4 मीटर ऊंचा, सुंगधित और कई वर्षों तक हराभरा रहता है। यह तो कोमल होता है और इसमें सारी सारी डालियाँ होती हैं। इसका जड़वत् गोंद तथा गंधयुक्त होता है। इसका गोंद मार्च से अगस्त महीने में निकलता है। इसके तने और जड़ में चीरा लगा राल या गोंद प्राप्त होता है, जिसे हींग कहते हैं। शुद्ध हींग (हींग) सफेद, स्फटिक के आकार का, 5 मि.मी.। व्यास के गोल या चपटे वर्ष में होता है और हींग निकालने के लिए इसमें चार पुराने पौधे श्रेष्ठ होते हैं। इसे पीस कर पाउडर (हींग/एस्फोटिडा पाउडर) बनाया जाता है। तेज गंध आती है जो अशानीय होती है। इसकी तेज़ गंध के कारण इसे अंग्रेजी में डेविल डांग यानि राक्षस का गोबर कहा जाता है। एक पेड़ से लगभग 100 ग्राम तक लेकर 300 ग्राम तक हींग प्राप्त हो सकती है। हींग का उत्पादन ईरान और अफगानिस्तान में सबसे अधिक होता है। भारत में इसका प्रोडक्शन कश्मीर और पंजाब में होता है। सामान्यतया हींग को बाजार में बेचकर जाना जाता है। हींग में साउदी या गोण्डा आदि मिलाये जाते हैं। बाजार में मिलने वाली ज्यादातर हींग हींग नहीं होती इसमें आटा मिलता है।
असली हींग को ऐसे पहचानें।
• असली हीग की पहचान करने के लिए हीग को पानी में घोलना चाहिए। पानी का रंग दूध जैसा हो जाए वैसा ही होना चाहिए।
• माचिस की जलती हुई तिली हीग के पास से चमकदार लौ खराब होती है और यह पूरी तरह से जलती है। फालतू हीग के साथ ऐसा नहीं होता।
• नकली हिंग में गंध के एसेंस का मिलान हो सकता है। वक्त के साथ अगर हींग की गंध जल्दी ही निकल जाती है तो हींग नकली होती है।
अनेक नामों में हींग के नाम (विभिन्न भाषाओं में हींग को कहा जाता है)
हींग का वनस्पति नाम फेरूला नार्थेक्स बोइस है। (फेरूला नार्थेक्स) और यह एपियासी (एपिएसी) कुल का है। हिंग को अन्य इनवेस्टमेंट से भी जाना जाता है।
हिंदी – हींग
अंग्रेजी (Hing In English) – तिब्बतन ऐसैफेटिडा (Tibetan assafoetida), हींग (Asafoetida)
तमिल (तमिल में हींग/हींग) - पेरुगियम (पेरुंगियम), पेरुंगयम (पेरुंगयम)
संस्कृत - सहस्रवेधि, जतुक, बाह्लीक, हिंगु, रामठ, हिंगुका
उर्दू – हिंग (Hing), हींग (Heeng)
कन्नड़ - हिंग (हिंग), हिंगु (हिंगु)
गुजराती - वधारानी (वधराणी), हिंग बधारणी (हिंग बधारणी)
तेलुगु - इंगुर (इंगुर), इंगुरा (इंगुरा)
बंगाली - हिंगु (हिंगु), हिंग (हिंग)
पंजाबी पंजाबी – हिंगे (Hinge), हींग (Hing)
मराठी – हींग (Hing)
मलयालम - करिक्कयम (करिक्कायम), कायम (कायम), रुगायम (रुंगयम)
अरबी - हल तीथ (हाल तीथ), हिल्तुट (हिल्टुट)
फ़ारसी - अगेनज़ह (अंजेज़ा), अंगुज़ा (अंगुज़ा)
आयुर्वेदिक ग्रंथों में बताया गया है कि हींग स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। हिंग कई चैलेंज में काम आती है। इसके सेवन से पेट के मामले, शरीर की गोलियां, पुराना मोटापा, मोटापा, पेट के रोग, गैस, कब्ज, दर्द, अरुचि, पथरी, मधुमेह में लाभ होता है। इतना ही नहीं हींग के उपयोग से मूत्र संबंधी रोग, हृदय रोग, पेट की गैस, अपच, भूख की कमी, सूखी खांसी, सांसों की बीमारी तथा उल्टी आदि में लाभ लिया जा सकता है। आइए जानते हैं कि आप हींग (Asafoetida) का उपयोग किन-किन चीजों में कर सकते हैं।
हींग के फायदे।
🔹हींग का उपयोग छाती में जमा कफ अरेस्ट में सहायक होता है। इसके लिए हिग के साथ शहद और जिंजर का उपयोग बहुत फायदेमंद है। इसका उपयोग से कुकर खाँसी भी ठीक हो सकती है।
🔹हींग को शराब में पीसकर सुखाएं उसे दो रत्ती मक्खन के साथ खाने से वात-विकार, प्लीहा-विकार, खांसी, सांस और कब-विकार में बेहद फायदा होता है।
🔹हींग दर्द कम करने में मदद मिलती है। असफ़ल महिलाओं को माहवारी के समय होने वाले दर्द से बहुत आराम मिलता है। इसके अलावा दांतों का दर्द, डायलिसिस या अन्य सिरदर्द में भी आराम मिल सकता है।
🔹 एक गिलास पानी में एक चुटकी हीग एलेवेन्ट लें। इसे गुनगुना पीने से फायदा होता है। दांत में दर्द हो तो हीग को नीबू के रस में सबसे बड़ा पेस्ट बना लें। इसे दांत पर लगाने से दर्द कम होता है।
🔹जोड़ों में दर्द हो रहा है एक गिलास पानी में मूंग के बराबर हीग स्टैमिना लें। जब हींग पूरी तरह से डूब जाए तो गुनगुना पिया। कुछ दिन नियमित इस प्रयोग से दर्द, जोड़ दर्द और सूजन आदि में आराम मिलता है।
🔹हींग का उपयोग पुराने समय से पेट के सामानों के लिए किया जा रहा है। इसका तत्व पेट के गैस, पेट के कीड़ा, पेट फूलना आदि में होता है।
🔹पेटदर्द व गैस होने पर हींग, अजवाइन, और काला नमक मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर गनगुनी पानी में हीग नासाकर नाभि के आसपास रहने से पेट में गैस निकल जाती है और पेट दर्द ठीक हो जाता है।
🔹हींग, अजजा, छोटी हरड़ और सेंधा नमक चारों बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। दिन में तीन बार आधा गर्म पानी से फ़ांकी लेने से अपच (अपच) ठीक होता है। भूख खुलती है। पेट का फूलना और भारीपन ख़त्म हो जाता है।
🔹हींग को गूलर के सुख के फलों के साथ मिलाकर खाने से पीलिया मिलता है।
🔹हींग, सेंधा नमक और घी एक तोला लेकर 150 ग्राम गोमूत्र में मिला दिया फिर उसे आदर्श कर केवल घी बाकी रह जाने पर पीने से अपस्मार दूर होता है।
🔹हींग आधा तोला, कपूर एक तोला, कत्था एक तोला और नीम के कोमल पत्ते 3 मासा लेकर तुलसी के रस में पीसा और चने जैसी गोलियां बनाईं। इस दिन तीन-चार बार गुलाब के अर्क में देने से लाभ होता है।
🔹हींग, काली मिर्च और कपूर की मात्रा फिर यह आटा एक एक तोला और लादेन 3 मास लेकर अदरक के रस में 6 घंटे तक एक-एक रत्ती की गोलियां बनाएं एक या दो गोली दिन में तीन बार लें से अतिसार और हेजा मिट है.
🔹हींग, कपूर और आम की गुठली बराबर-बराबर लेकर पुदीने के रस में पिसेकर चने के बराबर गोलियाँ बनाईं यह गोली देने से एज में फायदा होता है।
🔹हींग का सेवन करने से गर्भाधान का आर्द्रीकरण होता है, ऋतु स्राव सा होता है और शिशु के गर्भ में वेदना मिट सकती है।
🔹घी में सेकी हुई हींग घी के साथ खाने से प्रसूता महिला को आने वाले चक्कर मिट सकते हैं।
🔹हींग को पानी में पिसेकर पागल कुत्ते के टुकड़े के स्थान पर लगाने से लाभ हो सकता है।
पुरुषों में होने वाली यौन संबंधी समस्या जैसे नपुंसकटा, शीघ्रपतन, स्कोस्को में कमी आदि में हींग की शिकायत हो सकती है। भोजन में इसका नियमित उपयोग यौन समस्या से दूर है।
🔹एक गिलास गर्म पानी में हीग पीने से यौन शक्ति में टूटन होती है। इससे पुरुष और महिला के यौन अंगों में खून का दौरा बढ़ता है और यौन संबंधों में रुचि बढ़ती है।
🔹हिंग में पाए जाने वाले टिकटॉक के कारण फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचाव होता है और इस प्रकार के कैंसर की आशंका कम होती है, मूल रूप से हिंग का नियमित उपयोग करना चाहिए।
🔹मकड़ियाँ या किसी कीड़े के काटने वाला टुकड़ा या डंक मारने पर चिल्ला केले के टुकड़ों के साथ-साथ चुटकी भर हिंग से दर्द और सूजन में आराम मिलता है। कंक्रीट डंक मार दे तो हिंग को पानी में घिस पर बास्केटबॉल पेस्ट बनाने से आराम मिलता है।
🔹पुराने गुड़ के साथ खाने वाले से तुरंत बंद हो जाता है।
🔹नीम की कोमल पत्ती और हिंग को साथ में पीस कर लगाने से फोड़े, फुंसी, सांस आदि ठीक हो जाते हैं। इससे दादू भी मिटते हैं।
🔹हिंग को पानी में घिसकर जले हुए स्थान पर लगाने से जलन में आराम मिलता है और फोला नहीं होता। घरेलु उपचार के लिए यहां क्लिक करें।
🔹आचार लंबे समय तक बनाए रखने के लिए बनाया जाता है। हिंग में एंटीफंगल गुण होता है। मूल रूप से अचार को फिर से भरना चाहिए। इससे अचूक समयावधि नहीं होती। इसके अलावा आचार्य में हिंगोड़ से आचार्य का स्वाद बढ़ जाता है। अचूक होने से बचने के अन्य उपाय जानने के लिए यहां क्लिक करें।
हींग खाने के नुकसान
एसिडिटी या पेट में अल्सर आदि परेशानी हो तो हींग नहीं लेनी चाहिए।
यह रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। इसलिए आपरेशन से पहले 2 सप्ताह तक या बाद में हींग नहीं लेनी चाहिए।
गर्भावस्था में हींग नहीं लेनी चाहिए क्योंकि यह गर्म होती है। यह गर्भाधान में अकुंचन संकुचन पैदा हो सकता है। किस कारण से गर्भपात हो सकता है, इसलिए सावधान रहें।
हींग ब्लड वॉल्यूम प्रभावित होता है मूलतः यदि हाई ब्लड वॉल्यूम या लो ब्लड वॉल्यूम हो और दवा ले रहे हों तो हींग के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए।
हींग का तत्व मां के दूध में जा सकता है। इसलिए ब्रेस्ट वाॅल वाली मां को हींग नहीं लेनी चाहिए। यह बच्चे के लिए नुकसान दायक हो सकता है।
पाँच साल से छोटे बच्चों को हिंग नहीं चाहिए।
सामान्य व्यक्ति को मात्रा औषधि के रूप में भी एक दिन में 250 मिली ग्राम से अधिक नहीं लेनी चाहिए।
हींग को घी में सेके या सिरप के उपयोग के बिना गले को नुकसान पहुंचाता है हींग गुल्म, अजीर्ण, अपस्मार, शुल, संग्रहणी आदि में राहत का काम होता है। हींग गर्म है, मूल रूप से गर्म और पित्त प्रकृति वाले को इसका सेवन नहीं करना चाहिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार सेवन करें। अन्य पोर्टफोलियो करना चाहिए।

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