नमक को हल्के में न लें जाने नमक के सुभ अशुभ गुणों के बारे में।

नमक के बिना भोजन का स्वाद पूरा नहीं होता। अगर किसी को बिना नमक का खाना दिया जाए तो शायद वह उसके गले के नीचे से उतर जाएगा। हर घर में नमक का इस्तेमाल रोज़ होता है। आप भी प्राचीन से नमक लेकर आ रहे होगे। लेकिन अगर आप वास्तव में नमक के स्वास्थ्य लाभ चाहते हैं तो अपने भोजन में सी-सोल्ट और रॉक सॉल्ट जैसे अनरि हाइड्रा नमक को शामिल करें। इससे आपको हर तरह के स्टोर प्राप्त होते हैं। नमक का जीवन में बहुत उपयोग है। दाल या सब्जी में नमक ज्यादा हो तो नुकसान और कम हो तो भी नुकसान। नमक की उम्र भी घट जाती है और नमक की उम्र भी कम हो जाती है। नमक का उपयोग करना बहुत कम लोग जानते हैं। नमक कई प्रकार के होते हैं:- सेंधा नमक (पहाड़ी नमक), समुद्री नमक, काला नमक, सामान्य नमक आदि। इलेक्ट्रोलाइट्स में इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम आदि मौजूद होते हैं, जिससे न केवल शरीर में पानी का संतुलन बनता है, बल्कि तंत्रिका और खनिज के भी सही प्रकार के कार्यसंचालन में मदद मिलती है।

नमक को लेकर कुछ लोग सावधानी बरतते हैं और कुछ नहीं। जिन लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अंतिम नाम से हमारी जिंदगी में घोर संकट कैसे आ सकता है तो यह जिन लोगों के लिए है। आइए जानते हैं कि अंतिम नाम को लेकर कौन-कौन सी सावधानियां रखनी चाहिए ताकि हम संकटों से बच सकें। यहां मामला सिर्फ एस्डब्ल्यूए लैपटॉप सेस्टॉप का नहीं हुआ है।

किसका नमक, किसका नहीं?

ज्योतिष और परंपरा से यह ज्ञात होता है कि यदि कोई व्यक्ति पसंद नहीं करता है तो उसके लक्षण आपके लिए उपयुक्त नहीं हैं। किसी भी पापी पुरुष के यहाँ का नमक तो कडापी न ही स्थिर है अन्यथा आपका जीवन भी एक जैसा ही होता है। हर जगह का नमक या बेस्टिन इस बात पर भी हमेशा ध्यान दें। ज़बरदस्ती या मिलावट में किसी का नमक मत खाइये इससे आपका बड़ा नुकसान हो सकता है। नमक का वही खाये संस्कार जो महान हो और जो धर्म सम्मत का आचरण करता हो। नमक के संबंध में इस तरह की धारणा हमें परंपरा से प्राप्त होती है। हालाँकि मनोवैज्ञानिक रूप से देखें तो यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति का नाम या अन्य कुछ खा लेते हैं जो आपको पसंद नहीं है तो आप मन में ग्लानी महसूस करेंगे। नमक तो हमारे शरीर पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है।

नमक भूमि पर गिरना शुभ या अशुभ

 भारत में ऐसी मान्यता है कि भूमि पर नमक नहीं गिरना चाहिए। भारत में इसे गिरना अशुभ माना गया है। सिद्धांत यह है कि नमक को चंद्रमा से गिराने से और शुक्र की मित्रता हो जाती है। इसके अलावा खाना पकाने का समय डॉक्टर को नहीं देना चाहिए। उनके भोजन की पवित्रता नष्ट होती है और दरिद्रता आती है। नमक कम हो जाएगा तो बाद में डाल दिया जाएगा। भगवान को नैवेद्य का भोजन स्थापना के बाद ही करना चाहिए।

नमक को सीधे-सीधे किसी भी व्यक्ति के हाथ में मत दो। नमक का पेस्ट भी खाने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के संबंध ख़राब होते हैं।

कुंडली में चंद्र और मंगल होते हैं तो ऐसे करें प्रयोग।

सिद्धांत के अनुसार यदि कुंडली में चन्द्रमा का नमक है तो समुद्री या सामान्य नमक का उपयोग भोजन में न करें बल्कि सेंधा नमक का उपयोग करें। इससे आप रक्तचाप की समस्या से बचे रहेंगे।लेकिन अगर कुंडली में मंगल दोष है तो भोजन में समुद्री नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा अगर कुंडली में सप्तम भाव में सूर्य है तो ऊपर से कुंडली में खाना बनाने से घातक सिद्ध हो सकता है। एक बार किसी भी योग्य ज्योतिष को अपना कुंडली और उसके नाम की सलाह अवश्य लें।

किस पात्र में नमक

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नामांक को चन्द्र और शुक्र का प्रतिनिधि माना जाता है। यदि आप किसी स्टील या लोहे के पत्थर में हैं तो यह चंद्र और शनि का मिलन होगा जो बहुत ही घातक सिद्ध होता है। यह रोग और शोक का कारण बन जाता है। नमक को किसी भी तरह से प्लास्टिक के बर्तन में नहीं रखना चाहिए। नमक को केवल कांच के पात्र में रखने से ही यह बुरा प्रभाव नहीं देता।

 ऊपर से नमक डालना चाहिए या नहीं।

 बहुत से लोगों की आदत है कि वे दाल या सब्जी में ऊपर से नमक डालकर भी खाते हैं, जबकि पहले से ही सत्यम नमक डाला हो। ऐसे में धीरे-धीरे उनकी अधिक मात्रा में नमक खाने की आदत हो जाती है और अंत: ऐसे लोगों को ब्लड सप्लाई की शिकायत तो होती ही है साथ ही उनकी नैसर्गिक मौलिकता भी हो जाती है। एक शोध अध्ययन से पता चला है कि जिन लोगों को सबसे ज्यादा नमक की जरूरत होती है उनकी पूर्व समय में ही मृत्यु हो जाती है। यह डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के लिए अमेरिकी सरकार के केंद्रों पर शोध किया गया। शोध में कहा गया है कि फास्ट फूड और रेस्तरां खाना-खाने के कारण लोग पहले की तुलना में डबल खा खा रहे हैं।

कोनसा नमक कैसे बनाये।

रोज़ खाने वाले नमक में नमी और सीमेंट होता है। अनगिनत ब्लड की सूची है तो उसे कम करता है। इसके अलावा इसमें कुछ रसायन भी पाए जाते हैं। असली, बाजार में दो प्रकार के नमक पाए जाते हैं- एक रिआधा, पुराना सफेद नमक और दूसरा क्रिस्टल और पाउडर के रूप में सेंधा और काला नमक। आयुर्वेदिक विद्वानों का मानना ​​है कि सफेद नमक में सोडियम और अन्य केमिकल की भारी मात्रा होती है जो कि स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।

जबकि सेंधा नमक में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कॉपर जैसे लगभग 94 तरह के खनिज तत्व पाए जाते हैं। सेंधा नमक सबसे अच्छा माना जाता है। सामान्यत: वैधानिक गुलाबी रंग वाले सेंधा नमक को हिमालयन नमक भी कहा जाता है। यह त्रिदोषों से उपजी रोग को नियंत्रित करता है। यह नमक दिल और पेट के लिए भी अच्छा माना जाता है। यह कई तरह की शर्तों से जुड़ा है। जैसे रक्त प्रवाह, त्वचा रोग, गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस, अवसाद, तनाव आदि। पाचन में सहायता इस नमक के इस्तेमाल से प्लास्टर के प्लास्टर और जेलीन में भी राहत मिलती है।

इसी तरह काला नमक लौह तत्व से भरपूर होता है। ठंडी और रेचक प्रकृति के इस नमक से कब्ज, पाचन समस्या, गैस, सीने की जलन, गोइटर, हिस्टीरिया, मंद दृष्टि, हाई ब्लड प्रेशर, रक्त की कमी और अन्य कई बिमारियों के इलाज में लाभ मिलता हैं।



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