सिंघाड़ा क्या है?
भारत के कई राज्यों में मुख्य रूप से सिंघाड़ा (सिंघारा) की एक अलग पहचान पाई जा सकती है। अलग-अलग जंगलों में इसे अलग-अलग तरह से जाना जाता है, सिंहाड़ा, सिंघाना, लिंग नट, डेविल पॉड, बैट नट और बफेलो नट भी कहा जाता है। इसे वॉटर चेस्टनट (Water chestnut) और वॉटर कैलट्रॉप (Water Caltrop) भी कहते हैं। सिंघाड़ा का वनस्पतिक नाम ट्रैपा नटंस (Trapa natans) है। यह ओनाग्रेसी (ओनाग्रेसी) शाखा से संबंधित है। इसकी खेती तालाबों में होती है। इसका उपयोग लोगों की पोस्टिंग में विद्वानों के लिए भी किया जाता है। इसका पौधा एक लता है जो पानी में डूबने वाली है। इसका फल तिकोने आकार का होता है। जो सिर पर सींगों की तरह दो काँटे पर पाए जाते हैं। भारत के अलावा चीन में भी इसका मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है।
इसके फल के ऊपर एक मोटी परत का छिलका होता है, जिसे मोशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके गुड़ को सुखकर बनाया जाता है और फिर उससे बनाए गए आटे का इस्तेमाल करके अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाए जा सकते हैं। इसके एट्रिब्यूशन को गिरी का आटा भी कहा जाता है। इसकी खेती के लिए जमीन का होना जरूरी है। पानी के अंदर इसकी जड़ें बहुत दूर तक तैरती हैं। यह कांकेरेली या बलुई भूमि में उग नहीं सकता। इसके पत्ते तीन अंगुल जीवविज्ञान कटावदार होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं।
सिंघाड़ा को एक शरीर को ठंडक प्रदान करने वाला, वीर्य बढ़ाने वाला, मलरोधक, वातकारक, मोटापा दूर करने वाला, सेक्स की इच्छा बढ़ाने वाला और योनि से जुड़ी समस्याओं को दूर करने वाली दवा माना जाता है। आम तौर पर इसे समुद्र के मौसम में पाया जा सकता है। यह फल मच्छर युक्त होता है। जापानी में इस उपचार को हिशी कहा जाता है जिसका अर्थ लोजेंज या डंक के आकार का है। भारत, चीन और जापान के अलावा 40 से अधिक देशों में इसकी खेती की जाती है। इसके बीज में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जो दर्द को कम करने वाला, स्केल्प बढ़ाने वाला, बुखार कम करने वाला, भूख बढ़ाने वाला और शारीरिक कमजोरी दूर करने वाला होता है। साथ ही, यह दोस्त से भी आराम मिल सकता है।
भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से राज्यों में की जाती है
- बिहार
- पश्चिम बंगाल
- कृपया
- गुजरात
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
सिंघाड़ा का उपयोग किस लिए किया जाता है?
सिंघाड़ा या सिंघाड़ा का उपयोग निम्नलिखित आहार स्वास्थ्य उपचार में किया जा सकता है, जिसमें शामिल हैंः
डायरिया का इलाज कैसे करें मदद
डायरिया की समस्या पर इसके लिए पाउडर का सेवन करना चाहिए।
दांत से जुड़े दोस्ती के लिए।
अगर दांतों के हिलने या दांतों में कैविटी की समस्या है तो सिंघाड़े के सेवन से इस समस्या से राहत मिल सकती है। दांतों के स्थान पर दांतों से राहत पाने के लिए उस स्थान पर पेस्ट करने से दर्द से राहत मिलती है। इसमें दर्द कम करने की क्षमता होती है।
अनिद्रा की समस्या दूर करे।
वात दोष के बढ़ने के लिए इन्नामा की समस्या सबसे आम मानी जाती है। वात दोष को गैस की समस्या कहा जाता है। इसके अलावा तनाव की वजह से भी अनिद्रा की समस्या हो सकती है। सिंघाड़े में शरीर को ठंड़ा बनाए रखने के गुण होते हैं, जिसे शांत करने में मदद मिल सकती है जिससे तनाव कम करने और अच्छी नींद लाने में मदद मिल सकती है।
टी.बी. की समस्या से राहत दिलाए।
टी.बी. लाइसेंस से राहत पाने के लिए भी सिंघाड़ा माना जाता है।
ग्लानि की समस्या दूर करे।
अगर किसी को बार-बार प्यास लग रही है या शीशे की समस्या हो रही है, तो सिंघाड़ा खाने से राहत मिल सकती है। इसके लिए आप सिंघाड़े का बीज या इसका काढ़ा भी ले सकते हैं।
खुजली की समस्या से राहत दिलाए।
पित्त या कफ दोष के बढ़ने से बार-बार खुजली जैसी समस्या हो सकती है। जिसे दूर करने के लिए सिंघाड़े का सेवन करना सिद्ध हो सकता है।
शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करें।
यदि शारीरिक रूप से आपको बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होती है तो आप अपने दैनिक आहार में सिंघाड़े का सेवन शामिल कर सकते हैं। इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। जाने वाले गुणधर्म के कारण यह आसानी से पच भी जाता है। जिससे बॉडी फर्टिला भी बनी रहती है।
बवासीर के दर्द और निशानों से छुटकारा पाएं।
कच्चे सिंघाड़े के बीज को आम तौर पर एक फल के रूप में माना जाता है, क्योंकि भारत में उपवास के दौरान इसका सेवन मुख्य रूप से किया जाता है। अगर किसी को परेशानी की समस्या है, तो परेशानी के दर्द और परेशानी की समस्या को कम करने के लिए सिंघाड़ा खा सकते हैं।
बालों का स्टाइल कम करें।
स्वास्थ्य सेवा के अलावा सिघाड़ा का सेवन, सौंदर्य से संबंधित अध्ययन भी कर सकते हैं। अगर आप बालों के स्टाइल या खराब बालों से परेशान हैं, तो नियमित रूप से रॉ सिंघाड़ा वर्तमान। बाल होने की यह समस्या आम तौर पर पित्त दोष के असंतुलित होने का कारण हो सकती है। ऐसे में सिंघाड़े का सेवन करना पित्त दोष को कम करता है और बाल के जन्म को पोषण प्रदान करता है। पाए जाने वाले विटामिन बी और विटामिन ई जैसे पोषक तत्व बाल के स्वस्थ्य विकार के लिए हो सकते हैं।
त्वचा से जुड़ी फोटो को दूर करें।
त्वचा का काला पड़ना, कील-मुंहसे आदि की समस्या भी सिंघाड़े के सेवन से दूर हो सकती है। इस तरह की त्वचा संबंधी विकार आम तौर पर पित्त के अधिक बढ़ने का कारण हो सकते हैं। सिंघाड़े में पित्त को दूर करने और शरीर को ठंडा करने के गुण पाए जाते हैं जो त्वचा की सर्जरी में मदद कर सकते हैं।
अपरिपक्व नियंत्रण करने में मदद करें।
बिजनेस करने के लिए ब्लड शुगर कंट्रोल रखना सबसे जरूरी है। सिंघाड़ा को प्राकृतिक रूप से शुगर मुक्त माना जाता है। जिसके सेवन से शरीर में शुगर की मात्रा को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
यूरिन (मूत्र) पास करें समय पर जलन की समस्या दूर करें।
मूत्र संबंधी प्रभाव जैसे, मूत्र में समय-समय पर जलन होना, दर्द होना या धीरे-धीरे मूत्र त्यागना जैसे सिंघाड़े का काढ़ा पीने से राहत मिलती है।
इसके अलावा, निम्नतम स्वास्थ्य लाभ के उपचार में सिंघाड़े का सेवन भी शामिल हो सकता है:
पीलिया का इलाज करें, आग से जलने के घाव का इलाज करें, पेट की समस्या का इलाज करें, पोस्टक्लिन ब्लीडिंग को कम करने के लिए, योनि से अधिक स्वस्थ होने के लिए, यौन शक्ति बढ़ाने के लिए, डॉक्टर कांट को बढ़ाने के लिए क्लासिक आकार खून बढ़ाने के लिए, कान या नाक से का इलाज करने के लिए
सिंघाड़ा कैसे काम करता है?
आयुर्वेद में सिंघाड़े के फल और सप्लीमेंट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, सिट्रिक एसिड, नाइट्रोजन, प्रोटीन, निकोटिनिक एसिड, मैग्नीज, कार्बोहाइड्रेट, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, रेजिन, आयरन, मैग्नीशियम जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की मात्रा पाई जाती है।
सिंघाड़ा शरीर को ठंडा करके रखने में मदद कर सकते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण पीलिया का उपचार कर सकते हैं। साथ ही, यह मूत्र संक्रमण का इलाज, अपच और मतली का इलाज भी हो सकता है। यह खांसी की समस्या के साथ-साथ हाई ब्लड डिसऑर्डर की समस्या भी है ।
पोषक तत्त्व की मात्रा
- कीमत - 97
- कुल फ़ायदा – 0.1 ग्राम
- कीमत - 584
- कुल कॉर्बोहाइड्रेट - 24 ग्राम
- प्रोटीन – 1.4 ग्राम
प्रति 100 ग्राम सिंघाड़े में विटामिन और स्वाद की मात्रा
- कैल्शियम – 0.01
- विटामिन सी – 6%
- विटामिन बी6 – 15%
- मैग्नीशियम - 5%
उपयोग
सिंघाड़ा का उपयोग करना कितना सुरक्षित है?
आमतौर पर एक औषधि और बीज का सेवन पूरी तरह से सुरक्षित माना जा सकता है।हालाँकि, अगर आपको कोई गंभीर शारीरिक समस्या है, तो पहले इसका सेवन अपने डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
प्रभाव
सिंघाड़ा के क्या गुण हो सकते हैं?
अधिक मात्रा में सिंघाड़ा का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। जिसके कारण निम्नतम पुरातन समस्या हो सकती है, जिसमें शामिल हैंः
- पेट में दर्द होना
- नोट करना
- उत्तर होना
- पेट में भारीपन की समस्या
- गैस की समस्या
यदि आपको इसके सेवन से कोई गंभीर प्रभाव दिखाई दे तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
सिंघाड़ा लेने की खुराक क्या है?
सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति प्रति दिन मात्रा में इसका सेवन कर सकता है।एक बात का ध्यान रखें कि सिंघाड़ा खाने के बाद पानी न पीएं।
यह किस प्रकार से पुरातन रूप में उपलब्ध है?
- सिंघाड़ा का कच्चा बीज
- सिंघाड़ा बीज का पाउडर
- काढ़ा
- कच्चा सिंघाड़ा
यदि आपका इस पर किसी प्रकार का कोई प्रश्न है, तो विश्लेषण से सर्वोत्तम होगा।
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