अब सबसे बड़ा और काम का सवाल यह है, हम अपने इस जीवित एंटीना को वापस सही फ्रीक्वेंसी पर कैसे लाएं ? हम अपनी आंतरिक ऊर्जा को सैटेलाइट की तरह हाई और पावरफुल कैसे बनाएं ? ताकि हम ब्रह्मांड से सुख, शांति और समृद्धि के बेहतरीन सिग्नल्स को रिसीव कर सकें।
आइए इस नौवें अध्याय में अपनी फ्रीक्वेंसी (Vibration) को बढ़ाने के 3 अचूक और वैज्ञानिक तरीकों को समझते हैं।
1 ध्यान (Meditation), एंटीना को री-सेट करने का बटन।
जब आपका मोबाइल हैंग होने लगता है या इंटरनेट काम नहीं करता, तो आप क्या करते हैं ? आप उसे रीस्टार्ट (Restart) करते हैं। इंसानी दिमाग के लिए ध्यान (Meditation) बिल्कुल वही रीस्टार्ट बटन है।
० वैज्ञानिक पहलू:- जैसा कि हमने अध्याय 3 में जाना था, सामान्य अवस्था में हमारा दिमाग अशांत बीटा वेव्स (Beta Waves) छोड़ता है। लेकिन जब आप रोज़ 15 से 20 मिनट के लिए आँखें बंद करके शांत बैठते हैं, तो आपका दिमाग तुरंत अल्फा (Alpha) और थीटा (Theta) तरंगों में शिफ्ट हो जाता है।
० असर:- ये तरंगें आपके मस्तिष्क के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड को शांत और अत्यधिक व्यवस्थित (Coherent) बना देती हैं। ध्यान करने से आपके एंटीना पर जमा तनाव की धूल साफ़ हो जाती है, जिससे आप ब्रह्मांडीय चेतना (Cosmic Energy) से सीधे जुड़ जाते हैं।
2 गहरी सांसें और प्राणायाम, ऊर्जा का बूस्टर डोज़।
हमारे रेडियो या टीवी एंटीना को चलने के लिए बिजली (Power) की ज़रूरत होती है। हमारे इस इंसानी शरीर रूपी एंटीना की बिजली का नाम है- प्राण ऊर्जा (Prana या Life Force)।
० काम करने का तरीका:- जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारी सांसें बहुत छोटी और तेज़ चलती हैं, जिससे ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। इसके विपरीत, जब आप सचेत होकर गहरी और धीमी सांसें लेते हैं (जैसे अनुलोम-विलोम या भ्रामरी प्राणायाम) तो आपके शरीर के हर सेल को भरपूर ऑक्सीजन और प्राण ऊर्जा मिलती है।
० असर:- गहरी सांसें आपके रीढ़ की हड्डी के पास मौजूद सभी 7 ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय कर देती हैं। इससे चक्रों के ब्लॉकेज खुलते हैं और आपके शरीर की फ्रीक्वेंसी तुरंत लो से हाई हो जाती है।
3 कृतज्ञता (Gratitude), ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली चैनल।
लॉ ऑफ रेजोनेंस के अनुसार, ब्रह्मांड में सबसे ऊँची और शक्तिशाली फ्रीक्वेंसी प्रेम और कृतज्ञता (Gratitude) की होती है। कृतज्ञता का मतलब है, जो कुछ भी आपके पास है, उसके लिए दिल से धन्यवाद कहना।
० मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक सच:- जब आप शिकायत करते हैं कि मेरे पास यह नहीं है, मेरी किस्मत खराब है, तो आप कमी (Scarcity) की फ्रीक्वेंसी पर ट्यून होते हैं। लेकिन जब आप दिल से कहते हैं कि मेरे पास जो जीवन, जो साँसें और जो भी सुविधाएं हैं, उसके लिए धन्यवाद, तो आपका दिल (Heart) एक बेहद शक्तिशाली और सकारात्मक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाने लगता है।
० असर:- कृतज्ञता आपके एंटीना को सीधे ब्रह्मांड के सुपर-सिग्नल से जोड़ देती है। जब आप जो है उसके लिए धन्यवाद देते हैं, तो लॉ ऑफ रेजोनेंस के नियम से आपकी जिंदगी में ऐसी चीजें और बढ़ने लगती हैं जिनके लिए आप धन्यवाद दे सकें।
कुछ छोटे और आसान दैनिक टिप्स।
० प्रकृति के साथ जुड़ें (Grounding):- रोज़ कुछ मिनट नंगे पैर हरी घास या मिट्टी पर चलें। इससे पृथ्वी की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा आपके शरीर के अतिरिक्त तनाव (Negative Charge) को सोख लेती है।
० सकारात्मक शब्दों का प्रयोग:- सुबह उठते ही सबसे पहले खुद से सकारात्मक बातें (Affirmations) कहें, जैसे, मैं शांत हूँ, मैं ऊर्जावान हूँ, और आज का दिन अद्भुत है। यह आपके एंटीना का सुबह का ट्यूनिंग प्रोसेस है।
निष्कर्ष।
ट्यूनिंग आपके हाथ में है
अपनी फ्रीक्वेंसी को बढ़ाना कोई जादू नहीं है, यह पूरी तरह से एक विज्ञान है। आप हर पल यह चुन सकते हैं कि आप अपने विचारों और आदतों के ज़रिए किस चैनल पर रहना चाहते हैं। जब आप अपनी फ्रीक्वेंसी हाई कर लेते हैं, तो आपका पूरा जीवन बदलने लगता है।
अब हम इस खूबसूरत और रहस्यमयी सफर के आखिरी पड़ाव पर पहुँच चुके हैं। अगले और अंतिम अध्याय में हम इस पूरी सीरीज़ का निचोड़ देखेंगे कि कैसे हम सब मिलकर इस कॉस्मिक नेटवर्क को चलाते हैं और हमारा अंतिम अस्तित्व क्या है।
तो चलिए मिलते हैं अगले और आखिरी भाग में, अध्याय 10 निष्कर्ष:- कॉस्मिक नेटवर्क और हमारा अस्तित्व (हम सब एक हैं)।
अस्वीकरण (Disclaimer)।
इस अध्याय में प्रस्तुत फ्रीक्वेंसी और वाइब्रेशन बढ़ाने के तरीके व्यक्तिगत विकास, ध्यान (Meditation) और वैकल्पिक ऊर्जा विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित हैं। यद्यपि इनमें से कई तरीके वैज्ञानिक शोधों (जैसे न्यूरोप्लास्टिसिटी और साउंड थेरेपी) से प्रेरित हैं, फिर भी इन्हें किसी भी प्रकार के पेशेवर चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक उपचार या क्लीनिकल डायग्नोसिस का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि आप किसी गंभीर मानसिक या शारीरिक अस्वस्थता से जूझ रहे हैं, तो कृपया प्रमाणित चिकित्सा विशेषज्ञों से संपर्क करें। इस जानकारी का उपयोग पाठक अपने विवेक और जिम्मेदारी पर करें।

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