इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी हमें दिखाई देता है, वह कुल अस्तित्व का एक बहुत छोटा हिस्सा है। विज्ञान कहता है कि हमारी आँखें प्रकाश के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का केवल 0.0035% हिस्सा ही देख पाती हैं। इसका मतलब है कि हमारे चारों ओर अदृश्य शक्तियों और तरंगों का एक बहुत बड़ा महासागर तैर रहा है, जिससे हम हर पल जुड़े हुए हैं।
इसे समझने के लिए आइए इन दोनों के विज्ञान और ऊर्जा के प्रवाह को एक साथ जोड़कर देखते हैं।
1 अदृश्य तरंगें vs. इंसान (एक तुलना)।
जिस तरह रेडियो, टीवी और सैटेलाइट्स अदृश्य तरंगों के जरिए काम करते हैं, ठीक उसी तरह इंसान भी ऊर्जा का एक रिसीवर और ट्रांसमीटर है।
फ्रीक्वेंसी और ट्यूनिंग (Frequency & Tuning)।
० सैटेलाइट/रेडियो:- हवा में हजारों फ्रीक्वेंसी की तरंगें मौजूद हैं। जब आप अपने टीवी या रेडियो को किसी खास फ्रीक्वेंसी (जैसे 93.5 FM) पर सेट करते हैं, तो वही चैनल दिखता या सुनाई देता है।
० इंसान:- इंसान का दिमाग और मन भी अलग-अलग विचारों, भावनाओं और ऊर्जाओं से खास फ्रीक्वेंसी पैदा करता है। जब आप सकारात्मक या आध्यात्मिक सोच में होते हैं, तो आपकी ट्यूनिंग ब्रह्मांड की उच्च ऊर्जाओं से जुड़ती है।
रिसीवर और ट्रांसमीटर (Receiver & Transmitter)।
० सैटेलाइट:- सैटेलाइट सिग्नल भेजती है (Transmit) और डिश एंटीना उसे पकड़ता है (Receive)।
० इंसान:- इंसान अपनी सोच, शब्दों और भावनाओं के जरिए ऊर्जा बाहर भेजता है (Transmitter) और ब्रह्मांडीय ऊर्जा व माहौल को अपने अंदर ग्रहण भी करता है (Receiver)।
2 इंसान की ऊर्जा ब्रह्मांड में कहाँ जाती है ?
० भौतिक विज्ञान का एक बुनियादी नियम है, ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत (Law of Conservation of Energy):- ऊर्जा न तो कभी पैदा की जा सकती है और न ही खत्म की जा सकती है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है।
जब हम सोचते हैं, बोलते हैं या कोई कार्य करते हैं, तो हमारे शरीर से तीन रूपों में ऊर्जा निकलती है।
1 विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा (Electromagnetic Energy)।
हमारे मस्तिष्क की न्यूरॉन गतिविधि से सूक्ष्म विद्युत-चुंबकीय तरंगें (Brain Waves) निकलती हैं। यह ऊर्जा शरीर की सीमाओं को पार करके ब्रह्मांडीय क्षेत्र (Cosmic Field) में विलीन हो जाती है।
2 उष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy)।
शरीर से लगातार गर्मी और तरंगों के रूप में ऊर्जा पर्यावरण में फैलती रहती है, जो वायुमंडल और अंतरिक्ष के ऊर्जा चक्र का हिस्सा बन जाती है।
3 विचार और सूक्ष्म ऊर्जा (Information / Intention Energy)।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सूचना (Information) कभी नष्ट नहीं होती। आपके द्वारा छोड़ी गई भावनाएँ, विचार और मानसिक कंपन ब्रह्मांड के विशाल ऊर्जा क्षेत्र में दर्ज हो जाते हैं।
3 सारांश, ब्रह्मांडीय नेटवर्क में हमारी भूमिका।
हम सब इस विशाल ब्रह्मांड में एक छोटे एंटीना की तरह हैं।
जो आप भेजते हैं, वही वापस आता है, जैसे टीवी एंटीना वही सिग्नल पकड़ेगा जिसके लिए वह सेट है, वैसे ही इंसान जिस तरह की ऊर्जा (शांति, ज्ञान, भय या प्रेम) बाहर छोड़ता है, ब्रह्मांड से उसी तरह की परिस्थितियां और ऊर्जाएं उसकी ओर आकर्षित होती हैं।
० स्थायी अस्तित्व:- शरीर अंततः मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन हमारे शरीर और मन से निकली ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, वह ब्रह्मांड के अनंत ऊर्जा महासागर का हिस्सा बनी रहती है।
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