क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप सोशल मीडिया पर किसी मुद्दे पर पूरी रिसर्च, फैक्ट्स और डेटा के साथ बात कर रहे हों, और सामने से कोई ऐसी बात कह दे कि आपका सिर चकरा जाए ? आप सोच में पड़ जाते हैं कि इस बात का मेरी बात से क्या लेना-देना ?
आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर बहस जीतना अक्सर सच साबित करने का नहीं, बल्कि सामने वाले के तर्क की हवा निकालने का खेल बन चुका है। अगर आप भी इंटरनेट के इस दंगल में बिना दिमागी शांति खोए विजेता बनना चाहते हैं, या कम से कम दूसरों की चालाकियों को पकड़ना चाहते हैं, तो आपको इन 5 खतरनाक कुतर्कों (Fallacies) को आज के ट्रेंडी अंदाज़ में ज़रूर समझना चाहिए।
मोस्ट- इस वीडियो को जरूर देखें इसमें महर्षि गोतम की बताई हुई बातें शेर की गई है, कि हम दूसरे के कुतर्क से कैसे बचे ?
1 व्हाटअबाउटिज़्म (Whataboutism), द रिवर्स गियर तकनीक ।
नया नाम- तुम करो तो चमत्कार, मैं करूँ तो कैरेक्टर ढीला ?
यह क्या है- जब आपके पास सामने वाले के सीधे आरोप का कोई जवाब न हो, तो बिना देर किए एक पुराना या अलग मुद्दा उठाकर उसी पर सवाल दाग दीजिए।
सोशल मीडिया उदाहरण ।
सामने वाला- इस शहर में ट्रैफ़िक की व्यवस्था बहुत ख़राब है।
आप अच्छा ? जब पिछले साल दूसरे शहर में बाढ़ आई थी, तब तो आप चुप थे ? आज ट्रैफ़िक की पड़ी है ।
असर- बहस मूल मुद्दे से भटककर पूरी तरह ट्रैक से उतर जाती है।
2 स्ट्रॉ मैन (Straw Man Fallacy), पुतला फूँको तकनीक।
नया नाम- कहा कुछ, समझा कुछ और... और रो दिए।
यह क्या है- सामने वाले की बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर या तोड़-मरोड़कर पेश करना कि वह एकदम बेतुकी लगने लगे, और फिर उस बेतुकी बात पर हमला करना।
सोशल मीडिया उदाहरण।
सामने वाला- मुझे लगता है बच्चों को ज़्यादा देर तक मोबाइल नहीं चलाना चाहिए।
आप- यानी आप चाहते हैं कि बच्चे टेक्नोलॉजी से दूर रहकर आदिमानव बन जाएँ ? बच्चों के भविष्य से इतनी नफ़रत क्यों ?
असर- सामने वाला अपनी बात सही साबित करने के बजाय सफाई देने में ही व्यस्त हो जाता है।
3 एड होमिनेम (Ad Hominem) पर्सनल अटैक तकनीक।
नया नाम- तर्क ख़त्म, तो प्रोफाइल पिक्चर पर हमला।
यह क्या है- जब आप सामने वाले के फैक्ट्स का मुकाबला नहीं कर पाते, तो आप सीधे उसके चरित्र, उसकी भाषा, उसकी डीपी (DP) या उसकी योग्यता पर उँगली उठाने लगते हैं।
सोशल मीडिया उदाहरण।
सामने वाला- (पूरी रिसर्च और डेटा के साथ अपनी बात रखता है)
आप- पहले अपनी प्रोफाइल पिक्चर ठीक कर लो, फिर बड़े-बड़े ज्ञान देना, दो फॉलोअर्स वाले अब हमें सिखाएँगे।
असर- यह तर्क की रीढ़ की हड्डी पर नहीं, सीधे सामने वाले के ईगो पर वार करता है।
4 फाल्स डिलेमा (False Dilemma) ज़बरदस्ती का बाइनरी ऑप्शन।
नया नाम- या तो तुम मेरे दोस्त हो, या तुम देशद्रोही हो।
यह क्या है- किसी भी मुद्दे को सिर्फ दो छोर (Black or White) में बांट देना, जबकि बीच में ढेरों और विकल्प या संभावनाएँ मौजूद होती हैं।
सोशल मीडिया उदाहरण।
सामने वाला- मुझे इस फिल्म की कहानी कुछ खास नहीं लगी।
आप- अगर तुम इस फिल्म के खिलाफ हो, इसका मतलब तुम हमारी संस्कृति के खिलाफ हो। तय कर लो किस तरफ हो।
असर- न्यूट्रल या बीच का रास्ता चुनने वालों को ज़बरदस्ती विलेन बना दिया जाता है।
5 स्लिपरी स्लोप (Slippery Slope) राई का पहाड़ तकनीक।
नया नाम- आज उँगली पकड़ी है, कल पूरा शहर निगल जाएगा।
यह क्या है- यह दावा करना कि अगर आज एक छोटी सी चीज़ को होने दिया गया, तो इसके बाद विनाशकारी घटनाओं की एक चेन शुरू हो जाएगी, जिसका कोई लॉजिक नहीं होता।
सोशल मीडिया उदाहरण।
सामने वाला- ऑफिस में वीकेंड पर कैजुअल कपड़े पहनने की अनुमति होनी चाहिए।
आप- आज कैजुअल कपड़े पहनेंगे, कल शॉर्ट्स पहनकर आएँगे, परसों ऑफिस को पब बना देंगे और तरसों कंपनी दिवालिया हो जाएगी।
असर- यह डर पैदा करके किसी भी छोटे बदलाव को तुरंत रोकने का सबसे कारगर कुतर्क है।
गहराई से समझें, हम सोशल मीडिया पर इतने अतार्किक (Irrational) क्यों हो जाते हैं ?
पर्दे के पीछे का सच यह है कि सोशल मीडिया का एल्गोरिदम इस कुतर्क को बढ़ावा देता है। प्लेटफॉर्म्स को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बात कितनी सच है, उन्हें सिर्फ 'एंगेजमेंट' (Engagement) चाहिए। गुस्सा, विवाद और कुतर्क सबसे ज़्यादा कमेंट्स और शेयर्स बटोरते हैं।
इसके अलावा, इंटरनेट पर ज़्यादातर बहसें सत्य की खोज के लिए नहीं, बल्कि अहंकार (Ego) की तुष्टि के लिए होती हैं। लोग उन फैक्ट्स को देखना ही नहीं चाहते जो उनके विश्वास के खिलाफ हों (जिसे साइकोलॉजी में कन्फर्मेशन बायस कहते हैं)।
प्रो-टिप (Disclaimer)।
यह कंटेंट सोशल मीडिया पर महान ज्ञानी बनने और दूसरों के कुतर्कों को पकड़ने (और उन पर हंसने) के लिए बेस्ट है। लेकिन याद रहे, असली निंजा वही है जो खुद इन कुतर्कों का शिकार होने से बचे।
इन 5 कुतर्कों को सीखने का मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों पर कीचड़ उछालने के लिए इनका इस्तेमाल करें। बल्कि इसका असली मक़सद खुद को डिजिटल मैनिपुलेशन (Digital Manipulation) से बचाना है। जब आप इन चालों को पहचानना सीख जाते हैं, तो आप किसी के उकसावे में आकर अपना समय और मानसिक शांति बर्बाद करना बंद कर देते हैं। अगली बार जब कोई आपसे ऐसा कुतर्क करे, तो मुस्कुराएं और आगे बढ़ें क्योंकि असली निंजा वही है जो कुतर्क के दलदल में पैर ही न रखे।
अब आपकी बारी- कमेंट सेक्शन में बताएं कि सोशल मीडिया पर आपके साथ इनमें से कौन सा कुतर्क सबसे ज़्यादा हुआ है ? क्या आपके पास भी कोई ऐसा उदाहरण है ? नीचे कमेंट करें, धन्यवाद ।

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