नशे की जिद्दी लत को तोड़ने के व्यावहारिक और वैज्ञानिक उपाय ।

जब नशा व्यक्ति के दिमाग पर पूरी तरह हावी हो जाता है, तो वहाँ कोई भी तर्क (Logic) काम नहीं करता । इंसान का दिमाग खुद जानता है कि नशा उसके शरीर, पैसे और परिवार को बर्बाद कर रहा है, लेकिन फिर भी वह उसे नहीं छोड़ पाता ।
​मनोविज्ञान के अनुसार, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गंभीर लत (Severe Addiction) की स्थिति में दिमाग का फ्रंटल कॉर्टेक्स (Frontal Cortex - सोचने समझने वाला हिस्सा) कमजोर हो जाता है और अमिगडाला व रिवॉर्ड सिस्टम (हठ करने वाला हिस्सा) पूरी तरह नियंत्रण ले लेता है । ऐसी स्थिति में केवल ज्ञान या तर्कों से काम नहीं चलता, बल्कि कुछ ठोस, व्यावहारिक और वैज्ञानिक उपायों की आवश्यकता होती है ।

​जब तर्क फेल हो जाएं ।
​अक्सर लोग नशा करने वाले व्यक्ति को समझाते हैं तुम समझते क्यों नहीं ? यह तुम्हारी सेहत खराब कर रहा है, पैसे बर्बाद कर रहा है । लेकिन सच तो यह है कि नशा करने वाला व्यक्ति यह सब पहले से जानता है । समस्या यह नहीं है कि वह समझना नहीं चाहता, समस्या यह है कि उसका दिमाग इस समय किसी भी तर्क या लॉजिक को स्वीकार करने की स्थिति में ही नहीं है ।
​जब लत इतनी गहरी हो जाए कि इंसान चाहकर भी खुद को न रोक पाए, तो समझ लीजिए कि अब मामला केवल इच्छाशक्ति (Willpower) का नहीं रहा, बल्कि यह एक मस्तिष्क की बीमारी बन चुका है । इसे ठीक करने के लिए तर्कों की नहीं, एक सही रणनीति और सही उपायों की जरूरत होती है ।
​आइए जानते हैं कि जब दिमाग पर नशा हावी हो, तो इस चक्रव्यूह को तार्किक और व्यावहारिक रूप से कैसे तोड़ा जाए ।

​1 डिटॉक्सिफिकेशन और मेडिकल थेरेपी (Medical Help First) ।
​जब नशा बहुत पुराना हो जाता है, तो उसे अचानक छोड़ना शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है । इसे विड्रॉल सिम्प्टम्स (Withdrawal Symptoms) कहते हैं, जिसमें शरीर कांपना, उल्टी आना, तेज सिरदर्द या भयानक बेचैनी शामिल है ।
​उपाय- ऐसी स्थिति में किसी अच्छे मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या नशामुक्ति विशेषज्ञ से मिलें । आज के समय में ऐसी सुरक्षित दवाइयाँ (जैसे निकोटीन पैच, या क्रेविंग कम करने वाली दवाएं) मौजूद हैं जो बिना तकलीफ के शरीर से जहर को बाहर निकालने (Detoxify करने) में मदद करती हैं ।

​2 क्रेविंग का समय नोट करें (Track the Craving Window)।
​मनोविज्ञान कहता है कि नशे की तीव्र इच्छा (क्रेविंग) कभी भी लगातार घंटों तक नहीं रहती । यह एक लहर (Wave) की तरह आती है जो अधिकतम 15 से 20 मिनट के लिए बहुत तेज होती है और फिर धीरे-धीरे शांत हो जाती है ।

​उपाय- जैसे ही नशा करने का मन करे, घड़ी देखें और खुद को चुनौती दें कि चाहे कुछ भी हो जाए, मुझे अगले 20 मिनट तक रुकना है । इस 20 मिनट के दौरान कोई भी शारीरिक काम शुरू कर दें जैसे ठंडे पानी से नहा लेना, तेज वॉक पर निकल जाना या किसी ऐसे व्यक्ति से फोन पर बात करना जो आपको सकारात्मक ऊर्जा देता हो ।

HALT का सिद्धांत- अक्सर लोग तब नशे की ओर भागते हैं जब वे Hungry (भूखे), Angry (गुस्से में), Lonely (अकेले) या Tired (थके हुए) होते हैं ।

​3 माहौल और रास्तों को बदलें (The Environmental Change) ।
​हमारा अवचेतन मन रास्तों, दुकानों और लोगों को देखकर पुराना पैटर्न एक्टिव कर देता है । अगर आप रोज उसी रास्ते से गुजरेंगे जहाँ नशे की दुकान है, या उन्हीं दोस्तों से मिलेंगे जो नशा करते हैं, तो आपका दिमाग तर्कों को भूलकर घुटने टेक देगा ।

​उपाय- अपने ऑफिस या घर आने-जाने का रास्ता बदलें । घर में मौजूद हर वह चीज फेंक दें जो नशे की याद दिलाती हो (जैसे लाइटर, एशट्रे या खाली बोतलें) । अपनी जेब में भारी कैश रखना बंद कर दें, ताकि तलब उठने पर भी आप तुरंत नशा खरीद न सकें ।

ट्रिगर्स की पहचान (Identify Triggers) ।
 उन परिस्थितियों, दोस्तों या जगहों से दूर रहें जो नशा करने की इच्छा को दोबारा जगाती हैं (जैसे- खाली बैठना या तनाव) ।

​4 रिप्लेसमेंट थेरेपी अपनाएं (Substitute the Habit) ।
​आप दिमाग से किसी आदत को सीधे डिलीट नहीं कर सकते, आप उसे केवल रिप्लेस (बदल) कर सकते हैं । जब इंसान नशा छोड़ता है, तो उसके हाथ और मुंह को खालीपन का अहसास होता है ।

​उपाय- जब भी बीड़ी, सिगरेट या गुटके की याद आए, तो उसकी जगह मुंह में सौंफ, इलायची, मुलेठी या शुगर-फ्री च्विंगम रख लें । यह आपके मस्तिष्क को एक नकली संतुष्टि (False Satisfaction) देता है, जिससे असली नशे की तलब धीरे-धीरे कम होने लगती है ।

डोपामाइन डिटॉक्स (Dopamine Detox) ।
वैज्ञानिक रूप से, नशा दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को हैक कर लेता है । शुरुआत के कुछ हफ्ते सबसे मुश्किल होते हैं क्योंकि दिमाग को बिना नशे के जीने की आदत डालनी होती है ।

​5 संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) ।
​यह एक मनोवैज्ञानिक तरीका है जिसमें थेरेपिस्ट व्यक्ति को यह सिखाते हैं कि जब उनका दिमाग नशे के पक्ष में झूठे तर्क गढ़ने लगे (जैसे आज बहुत तनाव है, सिर्फ एक कश ले लेता हूँ), तो उस विचार को पहचानकर उसे कैसे काटना है ।

मेडिकल सपोर्ट (De-addiction Centers) ।
गंभीर मामलों में सिर्फ इच्छाशक्ति काम नहीं आती, वहाँ Detoxification और CBT (Cognitive Behavioral Therapy) जैसी वैज्ञानिक थेरेपी की जरूरत होती है।

​पाठको के लिए एक विचार (Takeaway)।
​लत एक रात में नहीं लगी थी, इसलिए यह एक रात में छूटेगी भी नहीं । अगर आप बार-बार असफल हो रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कभी नहीं छोड़ सकते । इसका मतलब सिर्फ यह है कि आपको सही डॉक्टरी इलाज और एक नए तरीके की जरूरत है ।
​अगर आपका कोई अपना या आप खुद इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो शर्माना या खुद को कसूरवार मानना बंद करें । इसे एक शारीरिक और मानसिक बीमारी समझें और आज ही किसी विशेषज्ञ की मदद लें ।

पाठकों से सवाल- क्या आपके किसी परिचित ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति या डॉक्टर की मदद से नशे को हराया है ? उनकी कहानी नीचे कमेंट में जरूर बताएं ताकि दूसरों को प्रेरणा मिल सके ।

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