अचानक कुछ ऐसे लोग सक्रिय हो जाते हैं, जिन्हें आपकी यह रफ़्तार हजम नहीं होती । अब चाहे वो दुनिया का कोई भी इंसान हो, कोई एक्स, वाई, ज़ेड समझ लीजिए..., उनकी एक अजीब सी मानसिकता सामने आने लगती है ।
1 शब्दों का अभाव, तर्कों का जाल ।
दिलचस्प बात यह है कि ये लोग आपसे सीधे आकर कभी नहीं कहेंगे कि हम तुम्हारी तरक्की से परेशान हैं । उनमें इतनी हिम्मत या साफगोई नहीं होती । वे शब्दों से खुलकर वार नहीं कर सकते, इसलिए वे सहारा लेते हैं, तर्कों (Logic) का, साइकोलॉजिकल गेम्स का और छिपी हुई नकारात्मकता का ।
वे आपके हर सही फैसले में कोई न कोई ऐसी तार्किक कमी निकालने की कोशिश करेंगे जिससे आपका आत्मविश्वास डगमगा जाए । वे आपकी बड़ी से बड़ी कामयाबी को सिर्फ किस्मत का खेल साबित करने के लिए सौ तर्क दे देंगे । वे आपको यह अहसास कराने की कोशिश करेंगे कि आप जो कर रहे हैं, उसमें कुछ न कुछ गलत है । यह उनकी एक सोची-समझी मानसिक रणनीति होती है ताकि आप आगे बढ़ने के बजाय खुद पर शक (Self-doubt) करना शुरू कर दें ।
2 इस खामोश विरोध को पहचानिए ।
यह रोकने की ऐसी कला है जो बिना शोर किए की जाती है । जब आप आगे बढ़ रहे होते हैं, तो यह मानसिकता आपके रास्ते में कांटे बिछाने के लिए सामने नहीं आती, बल्कि आपकी ऊर्जा को सोखने के लिए बगल में आकर बैठ जाती है । वे आपकी ऊर्जा को ऐसी बहसों और तर्कों में उलझा देना चाहते हैं, जिनका आपकी प्रगति से कोई लेना-देना नहीं है ।
लेकिन याद रखिए, जो इंसान खुद कुछ बड़ा नहीं कर पाता, वो अक्सर दूसरों के बड़े कामों में कमियां निकालने का तार्किक विशेषज्ञ बन जाता है । उनका मकसद आपको हराना नहीं होता, उनका मकसद सिर्फ आपकी रफ़्तार को धीमा करना होता है ।
3 मेरा जवाब, मेरी खामोशी और मेरी रफ़्तार ।
तो ऐसे लोगों को क्या जवाब दिया जाए ?
क्या उनसे बहस की जाए ? क्या उनके हर बेतुके तर्क का जवाब तर्क से दिया जाए ?
बिल्कुल नहीं ।
भैंस के आगे बीन बजाने से संगीत का अपमान होता है, और नकारात्मक मानसिकता वालों के सामने अपने तर्कों को साबित करने से आपकी ऊर्जा का अपमान होता है ।
मेरा रास्ता साफ है। आपकी चालबाजियां और आपके मानसिक खेल आपकी सोच का दायरा दिखाते हैं, और मेरी लगातार होती तरक्की मेरी मेहनत का नतीजा दिखाती है। आप मुझे रोकने के लिए तर्कों के जाल बुनते रहिए, मैं उन जालों को तोड़कर आगे निकलने के रास्ते बनाता रहूँगा ।
जो लोग खुलकर बोल नहीं सकते और सिर्फ मानसिक रूप से खींचतान करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें मेरा एक ही मौन संदेश है,
आप अपनी साजिशों का स्तर बढ़ाइए, क्योंकि मेरी उड़ानों का स्तर अब आपकी सोच से बहुत ऊपर जा चुका है ।
अपनी ऊर्जा को ऐसे एक्स, वाई, ज़ेड लोगों पर बर्बाद करने के बजाय, उसे अपनी अगली बड़ी कामयाबी में लगाइए । आपकी सफलता की गूंज ही उनके हर झूठे तर्क का सबसे करारा और आखिरी जवाब होगी ।
वैज्ञानिक प्रमाण
इस मानसिकता का वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक आधार ।
जो लोग आगे बढ़ने पर आपके रास्ते में तार्किक और मानसिक रोड़े अटकाते हैं, उन्हें मनोविज्ञान की भाषा में क्रैब मेंटालिटी और टॉल पोपी सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है । यदि आप भी ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, तो इन वैज्ञानिक लेखों को ऊपर दिये लिंक की मदद से पढ़ सकते हैं जो इस बात का प्रमाण हैं कि यह समस्या आपकी नहीं, बल्कि उन लोगों की मानसिक असुरक्षा की है ।
यह एक ऐसा सामाजिक व्यवहार है जहाँ एक समूह के लोग किसी भी सदस्य की सफलता को कमतर आंकने या उसे मानसिक रूप से पीछे खींचने की कोशिश करते हैं । साइकोलॉजी टुडे के अनुसार, यह व्यवहार ईर्ष्या और असुरक्षा की भावना से पैदा होता है, जहाँ लोग खुलकर कुछ बोलने के बजाय तर्कों से आपके आत्मविश्वास को तोड़ते हैं ।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और अन्य मनोवैज्ञानिक संस्थानों के शोध बताते हैं कि जब लोग आपको शारीरिक या शाब्दिक रूप से नहीं रोक पाते, तो वे गैसलाइटिंग (Gaslighting) का सहारा लेते हैं । वे ऐसे झूठे या घुमावदार तर्क देते हैं जिससे आगे बढ़ने वाले व्यक्ति को अपनी ही काबिलियत पर शक होने लगे ।
ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के समाजशास्त्रियों द्वारा किया गया यह अध्ययन बताता है कि जब कोई व्यक्ति समाज या अपने दायरे में बहुत ऊपर उठने लगता है, तो आस-पास के लोग (बिना सीधे दुश्मनी के) उसकी आलोचना करने और उसमें कमियाँ निकालने लगते हैं ताकि उसे मानसिक रूप से मानसिक दबाव में लाया जा सके । इसे टॉल पोपी सिंड्रोम (Tall Poppy Syndrome) कहा जाता है ।
निष्कर्ष (Conclusion)।
निष्कर्ष, गति और मानसिकता का संतुलन
रफ्तार चाहे जिंदगी की हो, करियर की या आपके बिजनेस की यह आपको शुरुआती बढ़त तो दिला सकती है, लेकिन उस बढ़त को कामयाबी में बदलने का काम सिर्फ आपकी मानसिकता (Mindset) करती है । जब चीजें तेजी से बदलने लगती हैं, तो दबाव बढ़ना लाजिमी है । ऐसे में जो व्यक्ति अपने डर और घबराहट पर काबू पाकर शांत दिमाग से फैसले लेता है, वही असली विजेता बनता है । रफ्तार का आनंद लें, लेकिन अपनी मानसिकता के स्टेयरिंग पर नियंत्रण रखें । याद रखें, तेज दौड़ने से ज्यादा जरूरी है सही दिशा में दौड़ना ।

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