क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसे कायाकल्प करने वाली माना जाता है ? जी हां, हम बात कर रहे हैं पुनर्नवा की ।
पुनर्नवा दो शब्दों से मिलकर बना है, पुनः (फिर से) + नव (नया)। यानी जो आपके शरीर के अंगों को फिर से नया और ऊर्जावान बना दे।
पुनर्नवा हमारे लिए एक प्रकृति का वरदान है जो हमें ऋषि-मुनियों ने औषधि के रूप में खोज कर दीया।
पुनर्नवा हमारे शरीर के अनेक रोगों को ठीक कर सकती हैं।
पुनर्नवा नाम इसको इसीलिए दिया गया है क्योंकि यह बारिश में अपने आप पुनर्जीवित या अपने आप हरी भरी हो जाती है, ठीक इसी तरह से पुनर्नवा हमारे शरीर को भी फिर से नया बनाने की क्षमता रखती है, यानी शरीर को अंदर से इतना मजबूत बना देगी कि आपका बुढ़ापा आपको याद नहीं रहेगा इसलिए इसका जैसा नाम है वैसा इसका काम भी है और वैसे ही यह उत्पन्न होती है।
शरीर को अंदर से नया बनाने वाली जड़ी-बूटी, पुनर्नवा।
पुनर्नवा की दो प्रजातियां पाई जाती हैं एक गुलाबी फूलों वाली और दूसरी सफेद फूलों वाली पुनर्नवा के पत्ते थोड़ा अलग दिखेंदे और तना एक जैसे देखने को मिलेंगे लेकिन फूलों को देखने में साफ अलग अलग दिखाई देंगे। पुनर्नवा कहीं भी पंसारी की दुकान पर उपलब्ध है, पुनर्नवा की दवाइयां या इसका पाउडर आयुर्वेदिक स्टोर पर आसानी से मिल जाते हैं।

इसको अनेक भाषाओं में अलग अलग नाम से पुकारा जाता है।
अनेक भाषाओं में पुनर्नवा के नाम
राजस्थानी- साटो
इंग्लिश- स्प्रेडिंग हागवीड। (Spreading Hagweed.)
लैटिन- ट्रायेंथिमा पोर्टयूलेकस्ट्रम। (Trianthima portulacastrum.)
संस्कृत- पुनर्नवा:
हिन्दी- सफेद पुनर्नवा, विषखपरा, गदपूरना।
मराठी- घेंटूली।
गुजराती- साटोडी।
बंगला-श्वेत पुनर्नवा, गदापुण्या।
तेलुगू- गाल्जेरू।
कन्नड़-मुच्चुकोनि।
तमिल- मुकरत्तेकिरे, शरून्नै।
फारसी- दब्ब अस्पत। आदि नामो से पुनर्नवा को पुकारा जाता है।
पुनर्नवा कैसे इस्तेमाल करते हैं।
पुनर्नवा के गुण अनंत हैं यह पीलिया रोगों में रामबाण इलाज है, अनेकों दवाओं में इसका इस्तेमाल होता है, आयुर्वेदिक मे अनेक दवाओं में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
अगर आपको पुनर्नवा का इस्तेमाल करना है, तो आप कई तरह से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं इस को सुखाकर पाउडर के रूप में, इस को सुखाकर के काढा के रूप में या हरी-भरी को ही तोड़ के काढा के रूप में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, इसकी पत्तियां और तने को सब्जी के रूप में भी खाया जाता है। इसकी जड़ को अनेक रोगों के इलाज में इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस तरह से इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है यह लिवर, किडनी के लिए बहुत ही फायदेमंद है, पुनर्नवा बुढ़ापे को जवानी में बदलने की ताकत रखती है, हमारे शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघला करके बाहर करने की ताकत भी पुनर्नवा में है, पुनर्नवा पीने से हमारे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है और अतिरिक्त चर्बी और छोटी मोटी पथरी भी भाहर आ सकती है उसका इलाज भी इससे हो सकता है, इस तरह से पुनर्नवा हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद है।
पुनर्नवा के 4 जादुई फायदे ।
1 किडनी और लिवर का रक्षक:
यह शरीर से टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकाल कर किडनी और लिवर को अंदर से साफ और मजबूत रखता है।
2 सूजन से राहत (Anti-inflammatory) ।
अगर शरीर में वॉटर रिटेंशन या बेवजह सूजन की समस्या है, तो पुनर्नवा इसे प्राकृतिक रूप से ठीक करता है।
3 यूरिनरी हेल्थ में सुधार ।
यह यूटीआई (UTI) और पेशाब से जुड़ी समस्याओं में रामबाण की तरह काम करता है।
4 नेचुरल डिटॉक्स ।
यह आपके पूरे सिस्टम को रीबूट और रिचार्ज करता है, जिससे त्वचा पर भी चमक आती है।
इसे कैसे लें ?
इसे चिकित्सक की सलाह के अनुसार पुनर्नवा चूर्ण, काढ़े (Kwath) या पुनर्नवारिष्ट के रूप में लिया जा सकता है ।
ध्यान देने की जरूरत
इसका इस्तेमाल करने से पहले आपको डॉक्टर या चिकित्सक की सलाह ले लेनी चाहिए और उनकी देखरेख में ही आप इसका इस्तेमाल करें हमारा आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद
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