तुलसी के फायदें:-Health Benefits Of Tulsi in hinde


तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसमें विटामिन (विटामिन) और खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। सभी औषधियों को दूर करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाले गुणों से भरपूर इस औषधि का प्रत्यक्ष देवी-देवता बताया गया है क्योंकि इससे अधिक उपयोगी औषधि मनुष्य जाति के लिए अलग से कोई नहीं है। तुलसी को धार्मिक-महत्व के कारण, हर घर के आंगन में तुलसी के उपाय बताए गए हैं। तुलसी के कई शिलालेख हैं। श्वेत व कृष्ण प्रमुख हैं। उदाहरण के लिए राम तुलसी और श्याम तुलसी भी कहा जाता है।

अन्य सागरों में तुलसी के नाम

तुलसी का वानस्पतिक नाम Ocimum sanctum Linn. (ओमीमम् सेन्क्तम्), कुल का नाम लामियासी (लैमिएसी) है। अन्य सागरों में इसे निम्नतम एल्बो से कॉल किया जाता है।

हिन्दी: तुलसी, वृन्दा

संस्कृत: तुलसी, सुरसा, देवदुन्दुभि, अपेतराक्षसी, सहजा, बहुमंजरी, गौरी, भूतघ्नी

अंग्रेजी: तुलसी

उड़िया : तुलसी

कन्नड़: अरेड तुलसी (अरेड तुलसी)

गुजराती: तुलसी

बंगाली: तुलसी (तुलसी)

नेपाली: तुलसी (तुलसी)

मराठी: तुलस (तुलस)

मलयालम: कृष्णतुलसी (कृष्णतुलसी)

तमिल - तुलसी (तुलशी)

तेलुगु - गग्गेर चेट्टु (गैगर चेट्टु)

अरबी: दोहश (दोहश)

चरक संहिता और सुश्रुत-संहिता में तुलसी के गुणों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। तुलसी का पौधा 30 से 60 सेमी तक ऊंचा होता है और इसके फूल छोटे-छोटे सफेद और बैगनी रंग के होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से अक्टूबर तक होता है।

औषधीय उपयोग की दृष्टि से तुलसी के पौधे में अधिकतर गुणकारी मणियाँ पाई जाती हैं। आप सीधे उपचार से लेकर साफ कर खा सकते हैं। तुलसी के बीज के फायदे भी अनगिनत होते हैं। आप तुलसी के बीज के और नूतन के गुणों का भी उपयोग कर सकते हैं। इन खालीपन में कफ वात दोष को कम करने, पाचन शक्ति एवं भूख को बढ़ाने और रक्त को शुद्ध करने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा तुलसी के पत्ते के बुखार, दिल से जुड़े रोग, पेट दर्द, मलेरिया और संक्रामक संक्रमण आदि बहुत खतरनाक हैं। तुलसी के औषधीय गुणों में राम तुलसी की तुलना में श्याम तुलसी को प्रमुख माना गया है। आइए तुलसी के प्रयोग के बारे में विस्तार से जानें।

तुलसी के फायदे।

दिमाग के लिए भी तुलसी के फायदे लाजवाब तरीके से काम करते हैं। इसके प्रतिदिन सेवन से मस्तिष्क की संतृप्ति और याददाश्त तेज होती है। इसके लिए रोज़ाना तुलसी की 4-5 की संख्या में पानी के साथ बने रहें।

अधिक काम करना या अधिक तनाव में रहना सिरदर्द होना एक आम बात है। अगर आप भी अक्सर सिर दर्द की समस्या से परेशान रहते हैं तो तुलसी के तेल की एक दो बूंद नाक में डालें। इस तेल को नाक में डुबाए गए पुराने सिर दर्द और सिर से जुड़े अन्य सामानों में आराम मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि तुलसी के उपयोग का तरीका सही होना चाहिए।

कई लोगों को रात के समय ठीक से दिखाई नहीं देता है, इस समस्या को रतौंधी कहा जाता है। अगर आप रतौंधी से मिले तुलसी के व्यंजन आपके लिए काफी तो जादुई हैं। इसके लिए दो से तीन बूंद तुलसी-पत्र-स्वरास को दिन में 2-3 बार आंखों में डालें।

अगर आप साइनसाइटिस के मरीज हैं तो तुलसी की सब्जी या मंजरी को मसलकर खाएं। इन युवाओं को मसलकर पीने से साइनसाइटिस रोग से जल्दी आराम मिलता है।

तुलसी की पत्तियां कान के दर्द और सूजन से आराम दिलाने में भी असरदार है। अगर कान में दर्द है तो तुलसी-पत्र-स्वरस को गर्म करके 2-2 बूँद कान में डालें। इससे कान दर्द से जल्दी आराम मिलता है। इसी तरह अगर कान के पीछे वाले हिस्से में सूजन है तो इससे आराम पाने के लिए तुलसी के पत्ते तथा एरंड की कोंपलों को पीसकर उसमें थोड़ा नमक मिलाकर गुनगुना करके लेप लगाएं। कान दर्द से राहत दिलाने में भी तुलसी के पत्ते खाने से फायदा मिलता है।

तुलसी की पत्तियां दांत दर्द से आराम दिलाने में भी कारगर हैं। दांत दर्द से आराम पाने के लिए काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दांत के नीचे रखने से दांत के दर्द से आराम मिलता है।

सर्दी-जुकाम होने पर या मौसम में बदलाव होने पर अक्सर गले में खराश या गला बैठ जाने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। तुलसी की पत्तियां गले से जुड़े विकारों को दूर करने में बहुत ही लाभप्रद हैं। गले की समस्याओं से आराम पाने के लिए तुलसी के रस को हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर उससे कुल्ला करें। इसके अलावा तुलसी रस-युक्त जल में हल्दी और सेंधानमक मिलाकर कुल्ला करने से भी मुख, दांत तथा गले के सब विकार दूर होते हैं।

तुलसी की पत्तियों से बने शर्बत को आधी से डेढ़ चम्मच की मात्रा में बच्चों को तथा 2 से चार चम्मच तक बड़ों को सेवन कराने से, खांसी, श्वास, कुक्कुर खांसी और गले की खराश में लाभ होता है। इस शर्बत में गर्म पानी मिलाकर लेने से जुकाम तथा दमा में बहुत लाभ होता है।

शर्बत बनाने की विधि।

तुलसी पत्र  (मंजरी सहित, डाली) 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम तथा कालीमिर्च 15 ग्राम को 500 मिली जल में मिलाकर काढ़ा बनाएं, चौथाई शेष रहने पर छानकर तथा 10 ग्राम छोटी इलायची बीजों के महीन चूर्ण मिलाकर 200 ग्राम चीनी डालकर पकाएं, एक तार की चाशनी हो जाने पर छानकर रख लें और इसका सेवन करें।

तुलसी की पत्तियां अस्थमा के मरीजों और सूखी खांसी से पीड़ित लोगों के लिए भी बहुत गुणकारी हैं। इसके लिए तुलसी की मंजरी, सोंठ, प्याज का रस और शहद को मिला लें और इस मिश्रण को चाटकर खाएं, इसके सेवन से सूखी खांसी और दमे में लाभ होता है।

गलत खानपान या प्रदूषित पानी की वजह से अक्सर लोग डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। खासतौर पर बच्चों को यह समस्या बहुत होती है। तुलसी की पत्तियां डायरिया, पेट में मरोड़ आदि समस्याओं से आराम दिलाने में कारगर हैं। इसके लिए तुलसी की 10 पत्तियां और 1 ग्राम जीरा दोनों को पीसकर शहद में मिलाकर उसका सेवन करें।

प्रसव के बाद महिलाओं को तेज दर्द होता है और इस दर्द को दूर करने में तुलसी की पत्तियां काफी लाभदायक हैं। तुलसी-पत्र-स्वरस में पुराना गुड़ तथा खाँड़ मिलाकर प्रसव होने के बाद तुरन्त पिलाने से प्रसव के बाद होने वाले दर्द से आराम मिलता है।

तुलसी बीज चूर्ण अथवा मूल चूर्ण में बराबर की मात्रा में गुड़ मिलाकर 1-3 ग्राम की मात्रा में, गाय के दूध के साथ लगातार एक माह या छह सप्ताह तक लेते रहने से नपुंसकता में लाभ होता है।

तुलसी के नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। 20 ग्राम तुलसी बीज चूर्ण में 40 ग्राम मिश्री मिलाकर पीस कर रख लें। सर्दियों में इस मिश्रण की 1 ग्राम मात्रा का कुछ दिन सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वात एवं कफ से जुड़े रोगों से मुक्ति मिलती है।

तुलसी का पौधा सामग्री में शामिल है। तुलसी के पत्तों का काढ़ा खाने से वायु में कुछ ऐसा प्रभाव उत्पन्न होता है कि मलेरिया के मच्छर वहां से भाग जाते हैं, इसके पास नहीं फटकते, तुलसी-पत्रों का काढ़ा सुबह, दोपहर और शाम को पीने से मलेरिया में लाभ होता है।

दादू और खुजली में तुलसी का आर्क अपने गुण के कारण की तुलना होती है | यह दादू में होने वाली खुजली को कम करता है, और साथ ही उसके घाव को जल्दी ठीक करने में मदद करता है | यदि तुलसी के अर्क का सेवन किया जाए तो यह रक्त शोधन (रक्त को शुद्ध करने वाला) होने के कारण होता है। तुलसी के अर्क का सेवन करने से रक्त को शुद्ध करने में मदद मिलती है।

  

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शरीर में वात दोष के बढ़ने के कारण मासिक धर्म की समाप्ति होती है | तुलसी के बीज में वात को नियंत्रित करने का गुण होता है इसलिए इसका प्रयोग मासिक धर्म के अनुसार किया जा सकता है | तुलसी के बीज की कमजोरी को दूर करने में सहायक होता है, जिसके कारण मासिक धर्म के दौरान जो कमजोरी महसूस होती है उसे दूर करने में मदद मिलती है।

साँसों की दुर्गंध ज्यादातर पाचन शक्ति ख़राब होने के कारण होती है | तुलसी आपके दीपन और पाचन गुण के कारण सांसों की दुर्गंध को दूर करने में सहायक होती है | इसमें अपना प्राकृतिक सुगंध का कारण भी यह सांसों की दुर्गंध का नाश होता है।

चोट पर भी तुलसी का प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसमें सूजन को कम करने वाला गुण होता है। तुलसी का यही गुण चोट के घाव एवं उसकी सूजन को भी ठीक करने में सहायक होता है |

तुलसी के उपयोग से खोया हुआ चेहरा वापस आ जाता है, क्योंकि इसमें रूखा और पतला गुण होता है। रुक्स गुण के कारण यह त्वचा की त्वचा पर अत्यधिक तैलीय होने से मुंह को रोकती है, जिससे कीलों को दूर करने में मदद मिलती है इसके अलावा त्वचा के त्वचा पर दाग के निशान और मसूड़ों को हटाने में भी सहायता मिलती है | यदि तुलसी का सेवन किया जाए तो इसके रक्त शोधक गुण के कारण लाभकारी रक्त को शुद्ध करके चेहरे की त्वचा को निखारा जा सकता है |

5-10 मिली तुलसी-पत्र-स्वरास को पिलाने से तथा इसकी मंजरी एवं पादपों को पीसकर सांप के काटने वाली जगह पर लेप करने से सर्पदंश की पीड़ा में लाभ मिलता है। अगर मरीज़ का मरीज़ हो गया हो तो उसके रस को नाक में टपकाना चाहिए।

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तुलसी के नुकसान-Basil Side Effects in Hindi

तुलसी हमारे शरीर में रक्त को पतला करता है और इसलिए इसे खून के जमने पर रोक लगाने वाली औषधियों के साथ नहीं लेना चाहिए।

यदि मधुमेह या हाइपोग्लाइसीमिया से पीड़ित लोग, जो दवा ले रहे हैं और तुलसी का सेवन करते हैं, तो उनके रक्त शर्करा में अत्यधिक कमी हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान तुलसी की भारी मात्रा में गर्भाशय संकुचन (गर्भाशय संकुचन) और मासिक धर्म का कारण बन सकता है। विशेष रूप से पहली तिमाही में महिलाओं को इसके उपयोग से बचना चाहिए। ब्रेस्ट वॉल वाली बोल्ट के बारे में विशेष जानकारी नहीं है, लेकिन तुलसी के उपयोग से ब्रेस्ट की अवधि के दौरान सुरक्षा की दृष्टि।

अदरक तुलसी की चाय के अधिक मात्रा में सेवन करने से सीने में जलन, एसिडिटी और पेट में जलन पैदा हो सकती है।

यदि आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो एक खरीद लें ताकि जब भी आपको किसी विशेष समस्या का इलाज करने की आवश्यकता हो, तो आपके पास ताज़ा तुलसी उपलब्ध हो।

नोट:- किसी रोग के कारण समस्या हो सकती है। इसलिए आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर रखें, किसी भी जड़ीबूटी को ज्यादा खाना या पीना नहीं  चाहिए हर चीज की लिमिट रखना बहुत जरूरी है इन चीजों का साथ में ध्यान रखें।

हमने आपको तुलसी के बारे में जानकारियां इकट्ठा करके दी आपको हमारी यह जानकारियां कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

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