क्या आपको भी किसी काम के होने की उम्मीद में अस्थायी सुकून मिलता है और बाद में धोखा ? जानिए कैसे चालाक, भ्रष्ट और बिजनेसमैन मानसिकता के लोग आपकी अच्छाई का फायदा उठाते हैं और तार्किक रूप से इस मानसिक चक्रव्यूह से खुद को कैसे बचाएं ।
मन की झूठी तसल्ली, उम्मीदों का टूटना, और चालाक लोगों के खेल को बहुत ही विस्तार से, मनोवैज्ञानिक और तार्किक (logical) तरीके से समझते हैं ।
भाग 1 मन का भ्रम और अस्थायी सुकून की पूरी प्रक्रिया।
इंसानी दिमाग की एक बहुत बड़ी खूबी भी है और कमजोरी भी वह तनाव से बचना चाहता है । जब हम किसी बड़ी मुश्किल में होते हैं या किसी काम को लेकर परेशान होते हैं, तो हमारा दिमाग थकावट महसूस करने लगता है ।
०सब ठीक हो जाएगा का काल्पनिक महल ।
इस मानसिक थकावट से बचने के लिए इंसान अपनी सोच में एक काल्पनिक दुनिया बनाता है, जहाँ वह खुद से कहता है, चिंता मत करो, यह काम हो जाएगा, या वह इंसान मेरी मदद जरूर करेगा ।
जैसे ही हम यह सोचते हैं, हमारे मस्तिष्क को एक राहत का अहसास होता है । यह ठीक वैसा ही है जैसे जलती धूप में थोड़ी देर के लिए किसी पेड़ की छांव मिल जाए । इस पल में इंसान को जो सुकून मिलता है, वह असली नहीं होता, बल्कि उम्मीद का नशा होता है ।
०हकीकत का झटका और धोखे का अहसास।
दिक्कत तब शुरू होती है जब इंसान उस काल्पनिक सुकून को ही सच मानकर बैठ जाता है और व्यावहारिक कदम (practical steps) उठाना बंद कर देता है ।
जब समय बीतता है और असलियत सामने आती है (कि काम नहीं हुआ या उस व्यक्ति ने मना कर दिया), तो वह महल ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है ।
इस स्थिति में जो दर्द होता है, उसे इंसान धोखा कहता है । लेकिन अगर गहराई से देखें, तो यहाँ पहला धोखा हमारे अपने ही मन ने हमारे साथ किया था, जिसने हमें कड़वी हकीकत का सामना करने के बजाय मीठी कल्पना में सुला दिया ।
भाग 2 जब शक्तियां या चालाक लोग इस चक्र में शामिल होते हैं।
अब आते हैं आपके प्रश्न के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर । जब एक सीधा, सच्चा और अच्छा इंसान संकट में होता है, तो वह किसी सहारे की तलाश करता है । वह सहारा कोई बड़ा पद, कोई बड़ी शक्ति, कोई बड़ा बिजनेसमैन या कोई रसूखदार इंसान हो सकता है ।
यहाँ तीन अलग-अलग तरह की मानसिकताएं काम करती हैं ।
०अच्छा इंसान (The Empathetic Soul) ।
अगर कोई सच में अच्छा और ऊंचे विचारों वाला इंसान आपसे जुड़ता है, तो वह आपकी मजबूरी का फायदा नहीं उठाएगा । वह आपकी मदद निस्वार्थ भाव से करेगा या फिर साफ मना कर देगा । उसके साथ जुड़ने पर आपको जो सुकून मिलेगा, वह टिकाऊ होगा क्योंकि उसमें कोई छिपा हुआ एजेंडा (hidden agenda) नहीं होता ।
०बिजनेसमैन मानसिकता (The Transactional Mindset) ।
एक शुद्ध बिजनेसमैन या व्यापारिक सोच वाला व्यक्ति कभी भी भावनाओं या रिश्तों के लिए काम नहीं करता । उसके लिए दुनिया एक बाजार है ।
उनका गणित ।
जब आप उनसे जुड़ते हैं, तो वे सबसे पहले यह देखते हैं कि इस इंसान से मुझे क्या मिल सकता है ? (पैसा, प्रभाव, वोट, या कोई अन्य फायदा)।
धोखे का कारण।
जब तक आप उनके किसी काम के हैं, वे आपको इतना सम्मान और सुकून देंगे कि आपको लगेगा कि इनसे अच्छा कोई है ही नहीं । लेकिन जैसे ही उन्हें लगता है कि अब आपसे कोई फायदा नहीं मिलने वाला, वे अपना हाथ खींच लेते हैं ।
एक अच्छे इंसान के लिए यह व्यवहार धोखा है, लेकिन उस बिजनेसमैन के लिए यह सिर्फ एक बिजनेस डील थी जो खत्म हो गई ।
०भ्रष्ट और चालाक लोग (The Predators) ।
ये दुनिया के सबसे खतरनाक लोग होते हैं । ये वो लोग हैं जो गिद्ध की तरह नजर गड़ाए बैठे रहते हैं कि कब कोई परेशान या सीधा इंसान उनके जाल में फंसे ।
भरोसे का शिकार ।
चालाक लोग जानते हैं कि एक अच्छा इंसान बहुत जल्दी भावुक हो जाता है और दूसरों पर भरोसा कर लेता है । वे शुरुआत में आपको वैसा ही सुकून और आश्वासन देंगे जैसा आप ढूंढ रहे हैं । वे कहेंगे, तुम चिंता मत करो, मैं बैठा हूँ न, सब देख लूँगा ।
मकसद ।
उनका मकसद आपकी मदद करना नहीं, बल्कि आपकी मजबूरी का फायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा करना होता है । जब वे अपना फायदा निकाल चुके होते हैं, या जब आपको उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब वे आपको बीच मंझधार में छोड़ देते हैं । यह शुद्ध और जानबूझकर दिया गया धोखा होता है ।
चूंकि आप इसे तार्किक रूप से समझना चाहते हैं, तो इसका समाधान भी बहुत व्यावहारिक होना चाहिए । हम दुनिया से चालाक और भ्रष्ट लोगों को खत्म नहीं कर सकते, लेकिन हम खुद को उनका शिकार बनने से जरूर बचा सकते हैं ।
नियम 1
इरादे और चेहरे का अंतर समझिए
लोग जो बोलते हैं, उस पर तुरंत भरोसा मत कीजिए । चालाक लोगों की जुबान बहुत मीठी होती है । किसी भी इंसान को इस बात से मत आंकिए कि वह आपके संकट के समय कितनी मीठी बातें कर रहा है, बल्कि इस बात से आंकिए कि उसका अतीत (past track record) कैसा रहा है । क्या उसने पहले भी लोगों का इस्तेमाल किया है ? अगर हाँ, तो अगला नंबर आपका हो सकता है ।
नियम 2
भावनात्मक निर्भरता (Emotional Dependency) को खत्म करें ।
जब हम अपनी मानसिक शांति की चाबी किसी और के हाथ में दे देते हैं कि अगर यह इंसान हां कहेगा तो ही मुझे सुकून मिलेगा, तो हम खुद को कमजोर कर लेते हैं । अपनी सोच में सुकून जरूर ढूंढिए, लेकिन वह सुकून अपनी मेहनत, अपनी सूझबूझ और अपनी काबिलियत पर होना चाहिए, किसी दूसरे के वादे पर नहीं ।
नियम 3
लेन-देन के सिद्धांत को स्वीकारें ।
जब भी आप किसी बड़े पद, पैसे या चालाक मानसिकता वाले व्यक्ति के पास जाएं, तो यह मानकर चलें कि यहाँ सौदा व्यावहारिक होगा, भावनात्मक नहीं । अगर आप उनसे कुछ मदद की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट रखिए कि बदले में उन्हें क्या चाहिए । जब चीजें साफ (transparent) होती हैं, तो धोखे की गुंजाइश बहुत कम हो जाती है ।
निष्कर्ष (Conclusion)
यह दुनिया का एक कड़वा नियम है कि मासूमियत अक्सर चालाकी का भोजन बन जाती है ।
जब आप संकट में हों और आपका मन कहे कि सब ठीक हो जाएगा, तो उस सुकून को जरूर महसूस कीजिए, लेकिन तुरंत अपनी आंखें खोलकर यह भी देखिए कि धरातल पर सच क्या है । बड़ी शक्तियों और चालाक लोगों से जुड़ते समय अपने दिल के दरवाजे थोड़े बंद और दिमाग की खिड़कियां पूरी खुली रखिए । अच्छाई का मतलब सीधापन या बेवकूफी नहीं होना चाहिए, सच्ची अच्छाई वह है जो खुद की रक्षा करना भी जानती हो ।
