आज के इस छठे अध्याय में हम अध्यात्म और आधुनिक भौतिक विज्ञान (Modern Physics) के उस अद्भुत मिलन बिंदु को समझेंगे, जहाँ प्राचीन आकाश तत्व (Akashic Records) और विज्ञान का क्वांटम फील्ड (Quantum Field) एक ही सिक्के के दो पहलू नज़र आते हैं।
प्राचीन दर्शन का आकाश तत्व क्या है ?
भारतीय सनातन दर्शन में पांच बुनियादी तत्व (पंचमहाभूत) माने गए हैं, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। यहाँ आकाश का मतलब सिर्फ खाली आसमान या Space नहीं है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, आकाश ब्रह्मांड का वह सूक्ष्म और सर्वव्यापी तत्व है जो हर चीज़ के भीतर और बाहर मौजूद है।
वेदांत और प्राचीन दर्शन में माना गया है कि इस आकाश तत्व के पास अपनी एक स्मृति या याददाश्त है, जिसे आकाशिक रिकॉर्ड्स (Akashic Records) कहा जाता है। इसे आप ब्रह्मांड की डिजिटल लाइब्रेरी या कॉस्मिक इंटरनेट कह सकते हैं। मान्यता है कि सृष्टि की शुरुआत से लेकर आज तक जो कुछ भी घटा है, किसी ने जो भी सोचा है, बोला है या महसूस किया है, वह सब इस आकाश तत्व में तरंगों के रूप में हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है।
आधुनिक विज्ञान का क्वांटम फील्ड (Quantum Field Theory)।
अब ज़रा विज्ञान की प्रयोगशाला में चलते हैं। 20वीं और 21वीं सदी में जब वैज्ञानिकों ने परमाणु के भीतर झांका, तो उन्होंने पाया कि ब्रह्मांड का कोई भी हिस्सा वास्तव में खाली नहीं है। जिसे हम खाली स्थान (Vacuum) समझते हैं, वह असल में ऊर्जा की अदृश्य तरंगों से भरा हुआ है। विज्ञान इसे क्वांटम फील्ड (Quantum Field) कहता है।
क्वांटम फील्ड थ्योरी के अनुसार।
इस ब्रह्मांड में सब कुछ (तारे, ग्रह, इंसान, प्रकाश) इसी अदृश्य ऊर्जा के समंदर से पैदा होता है और अंत में इसी में विलीन हो जाता है।
जैसे समुद्र में लहरें उठती हैं और वापस समुद्र बन जाती हैं, वैसे ही क्वांटम फील्ड में ऊर्जा के कांपने (Vibration) से इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन जैसे कण बनते हैं, और जब वे शांत होते हैं, तो वापस ऊर्जा बन जाते हैं।
जब विज्ञान और अध्यात्म एक हो जाते हैं।
अगर आप ध्यान से देखें, तो हज़ारों साल पहले ऋषियों द्वारा बताया गया आकाश तत्व और आज के वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया क्वांटम फील्ड बिल्कुल एक ही चीज़ है। दोनों ही सिद्धांतों में तीन बातें बिल्कुल समान हैं।
० यह सर्वव्यापी है (Everywhere):- आकाश तत्व और क्वांटम फील्ड दोनों ही हर जगह मौजूद हैं। आपके कमरे के खाली स्थान में, अंतरिक्ष के निर्वात में, और आपके शरीर के भीतर के परमाणुओं के बीच भी।
० यह सूचनाओं को सहेजता है (Stores Information):- विज्ञान कहता है कि क्वांटम फील्ड में सूचना (Information) कभी नष्ट नहीं होती। प्राचीन दर्शन भी यही कहता है कि आकाशिक रिकॉर्ड्स में आपके हर कर्म और विचार का लेखा-जोखा हमेशा रहता है।
० यह सब कुछ आपस में जोड़ता है (Universal Connector):- हम सब बाहर से अलग दिखाई दे सकते हैं, लेकिन सूक्ष्म स्तर पर हम सब इसी एक ही ऊर्जा क्षेत्र (Field) से जुड़े हुए हैं। यानी, आप, मैं और यह पूरा ब्रह्मांड एक ही महासागर का हिस्सा हैं।
प्राण ऊर्जा और कॉस्मिक एनर्जी (Prana & Cosmic Energy)।
योग विज्ञान में जिसे प्राण ऊर्जा (Life Force/Prana) कहा जाता है, वह और कुछ नहीं बल्कि इसी ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का वह हिस्सा है जिसे हमारा शरीर रिसीव करता है। हमारा शरीर ब्रह्मांड के इस विशाल क्वांटम फील्ड से लगातार ऊर्जा लेता रहता है। जब हम ध्यान (Meditation) या प्राणायाम करते हैं, तो हम अपने ह्यूमन एंटीना को इस तरह खोल देते हैं कि ब्रह्मांड की यह कॉस्मिक ऊर्जा हमारे भीतर बहुत तेज़ी से प्रवाहित होने लगती है।
निष्कर्ष।
हम सब तरंगों के महासागर में हैं
अध्याय 6 का सबसे बड़ा सत्य यही है कि विज्ञान और अध्यात्म में कोई विरोध नहीं है। विज्ञान जिसे गणितीय समीकरणों और क्वांटम फील्ड के नाम से बुलाता है, अध्यात्म ने उसे चेतना और आकाश का नाम दिया है।
हमारा हर एक विचार इस कॉस्मिक फील्ड में एक लहर पैदा करता है। लेकिन क्या इस बात का कोई वैज्ञानिक सबूत है कि हमारे विचार वाकई भौतिक संसार को बदल सकते हैं ? क्या हमारे विचार पानी जैसी चीज़ों पर भी अपना प्रभाव छोड़ सकते हैं ?
यही बेहद हैरान कर देने वाले वैज्ञानिक प्रयोग हम देखेंगे अगले अध्याय में, अध्याय 7, विचार एक तरंग है। सबूत और प्रयोग (डॉ. मसारू इमोटो का पानी पर प्रयोग)।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह अध्याय प्राचीन वैदिक दर्शन (आकाश तत्व) और आधुनिक भौतिकी (क्वांटम फील्ड) के बीच केवल एक दार्शनिक और तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें दी गई समानताएं वैचारिक हैं। विज्ञान आकाशिक रिकॉर्ड्स की उपस्थिति की पुष्टि नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे एक बौद्धिक अन्वेषण के रूप में देखें।

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