गुरुत्वाकर्षण का भ्रम या इंसानी दिमाग का वो अजीब डर ?

गुरुत्वाकर्षण का भ्रम या इंसानी दिमाग का वो अजीब डर ? यह पंक्ति सुनते ही दिमाग में एक गहरा विज्ञान-फंतासी (Sci-Fi) या मनोवैज्ञानिक रोमांच पैदा होता है । क्या गुरुत्वाकर्षण सच में ब्रह्मांड का एक नियम है, या यह सिर्फ हमारे दिमाग का एक भ्रम है ? और अगर यह सच है, तो ऊंचाई से लगने वाला हमारा डर असल में किस चीज़ का है। ज़मीन पर गिरने का, या खुद को हवा में सौंप देने का ?

इस विचार को गहराई से समझने के लिए हमें इसे दो दृष्टिकोणों से देखना होगा । भौतिक विज्ञान (Physics) और मानव मनोविज्ञान (Psychology) ।

 आज ऐसे अनोखे वैज्ञानिक सिद्धांतों पर बात करते हैं जो विज्ञान की सबसे ताज़ा और सबसे अजीब सीमाओं से जुड़े हैं । 
​1 क्या गुरुत्वाकर्षण असल में कोई बल है ही नहीं ?

​बचपन से हमें सिखाया जाता है कि गुरुत्वाकर्षण एक ऐसा खिंचाव बल है जिससे पृथ्वी हमें अपनी तरफ खींचती है । लेकिन आइंस्टीन ने साबित किया कि गुरुत्वाकर्षण नाम का कोई बल असल में होता ही नहीं है । 
असल में, भारी वस्तुएं (जैसे सूर्य या पृथ्वी) अपने वज़न से अपने आस-पास के स्पेस और टाइम की चादर में एक मोड़ या गड्ढा पैदा कर देती हैं । जब कोई छोटी चीज़ (जैसे पृथ्वी) सूर्य के चक्कर लगाती है, तो वह किसी खिंचाव के कारण नहीं, बल्कि सूर्य द्वारा स्पेस में बनाए गए उस गड्ढे में सीधे चलने की कोशिश कर रही होती है । जिसे हम खिंचाव समझते हैं, वह वास्तव में मुड़े हुए स्पेस का एक ढलान है ।

भौतिक विज्ञान का नजरिया ।
क्या गुरुत्वाकर्षण एक भ्रम है?
आमतौर पर हम सोचते हैं कि गुरुत्वाकर्षण (Gravity) एक ऐसी ताकत है जो हमें ज़मीन से बांधकर रखती है, जैसे कोई अदृश्य रस्सी । लेकिन आधुनिक भौतिकी कुछ और ही कहती है ।

आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत (Theory of Relativity) ।
अल्बर्ट आइंस्टीन ने साबित किया कि गुरुत्वाकर्षण जैसी कोई आकर्षक शक्ति (Attractive Force) है ही नहीं । दरअसल, भारी वस्तुएं (जैसे पृथ्वी या सूरज) अपने आस-पास के स्पेस-टाइम (Space-Time Fabric) में एक मोड़ या झुकाव पैदा कर देती हैं ।

भ्रम क्यों ? हम जिसे गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिरना कहते हैं, वह वास्तव में उस झुके हुए स्पेस-टाइम में एक सीधी रेखा में गति करना है । इस लिहाज से, जिसे हम एक बल या फोर्स समझते हैं, वह ब्रह्मांड की बुनावट का एक ज्यामितीय भ्रम (Geometric Illusion) मात्र है ।

​2 ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्यमय ढांचा हर्कुलिस-कोरोना बोरियालिस ग्रेट वॉल । 

​हम सोचते हैं कि आकाशगंगाएं ही ब्रह्मांड की सबसे बड़ी चीज़ें हैं । लेकिन खगोलविदों ने अंतरिक्ष में एक ऐसे ढांचे की खोज की है जो इंसानी सोच से परे है । इसे Hercules-Corona Borealis Great Wall कहा जाता है ।
​यह अरबों आकाशगंगाओं का एक ऐसा विशालकाय सुपरक्लस्टर (गुच्छा) है, जो 10 अरब प्रकाश वर्ष के इलाके में फैला हुआ है । हमारा पूरा ब्रह्मांड लगभग 93 अरब प्रकाश वर्ष का है, यानी यह इकलौता ढांचा पूरे दृश्यमान ब्रह्मांड का करीब 11% हिस्सा घेरे हुए है । 
विज्ञान के मौजूदा नियम यह समझा ही नहीं पा रहे हैं कि बिग बैंग के बाद इतने कम समय में इतना बड़ा ढांचा आपस में जुड़ कैसे गया । 

​3 इंसानी दिमाग का एक अजीब डर।
अब बात करते हैं उस अजीब डर की, जिसे हम ऊंचाई का डर या एकरोफोबिया (Acrophobia) कहते हैं । लेकिन यह डर सिर्फ शारीरिक चोट का नहीं है । यह हमारे अस्तित्व और चेतना की गहराइयों से जुड़ा है ।

शून्य की पुकार (The Call of the Void) ।
क्या कभी किसी ऊंची इमारत की बालकनी या पहाड़ की चोटी पर खड़े होकर आपके मन में अचानक यह विचार आया है—क्या होगा अगर मैं यहाँ से कूद जाऊँ ? इसके लिए एक बहुत खूबसूरत शब्द है शून्य की पुकार ।

यह आत्मघाती प्रवृत्ति नहीं है । मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह आपके दिमाग का एक सुरक्षा संकेत (Safety Signal) है जो गलत तरीके से इंटरप्रेट हो जाता है ।
जब आप ऊंचाई पर होते हैं, तो आपका अचेतन मन (Subconscious) खतरे को भांपकर बहुत तेजी से अलर्ट भेजता है । जब आपका सचेतन मन (Conscious Mind) उस तीव्र अलर्ट को समझने की कोशिश करता है, तो उसे भ्रम होता है कि शायद वह खुद ही कूदना चाहता था ।

नियंत्रण खोने का डर (Loss of Control)।
हमारा दिमाग नियंत्रण (Control) से प्यार करता है । ज़मीन पर चलते हुए हमें लगता है कि सब कुछ हमारे काबू में है । लेकिन जैसे ही हम ऊंचाई पर जाते हैं, गुरुत्वाकर्षण का वह अदृश्य नियम हमें याद दिलाता है कि एक छोटी सी चूक और हमारा अपने शरीर पर से नियंत्रण हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा । वह डर गुरुत्वाकर्षण का नहीं, बल्कि पूर्ण बेबसी (Absolute Helplessness) का होता है ।

4 अनकैनी वैली (Uncanny Valley) ।
​यह मनोविज्ञान और रोबोटिक्स विज्ञान का एक ऐसा रहस्य है जो वैज्ञानिकों को हैरान करता है । जब हम किसी कार्टून या साधारण रोबोट को देखते हैं, तो हमें वह अच्छे लगते हैं । लेकिन जैसे ही कोई रोबोट या AI कैरेक्टर 95% से 99% तक बिल्कुल इंसान जैसा दिखने लगता है, तो हमारा दिमाग अचानक उससे आकर्षित होने के बजाय बहुत गहरा डर और नफरत महसूस करने लगता है ।

​इसे वैज्ञानिक अनकैनी वैली कहते हैं । विकासवादी वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसानी दिमाग में यह डर लाखों साल पहले किसी ऐसी प्रजाति या बीमारी से बचने के लिए पैदा हुआ था, जो दिखती तो बिल्कुल इंसानों जैसी थी, लेकिन इंसान नहीं थी ।

5 क्या गणित ब्रह्मांड की भाषा है, या सिर्फ इंसान की कल्पना ?। 
​यह विज्ञान और दर्शनशास्त्र की सबसे बड़ी बहस है । ब्रह्मांड में हर चीज़ तारों के घूमने से लेकर ब्लैक होल के बनने तक सब कुछ गणित के जटिल समीकरणों का पालन करती है ।
​वैज्ञानिक आज तक इस बात पर हैरान हैं कि गणित की खोज इंसानों ने की थी या इंसानों ने इसे ब्रह्मांड में सिर्फ ढूंढा है ?

अगर हम कल किसी एलियन सभ्यता से मिलते हैं, तो शायद हमारा पहनावा या भाषा उनसे न मिले, लेकिन 2 + 2 = 4 और \pi (पाई) का मान उनके लिए भी बिल्कुल वही होगा जो हमारे लिए है ।

निष्कर्ष- विज्ञान और भावना का टकराव।
तो, क्या गुरुत्वाकर्षण एक भ्रम है या दिमाग का डर ?
सच यह है कि गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड का वह खूबसूरत भ्रम है जिसके नियम से हमारा भौतिक शरीर बंधा है, और डर हमारे दिमाग की वह सुरक्षा प्रणाली है जो हमें उस भ्रम की ताकत का अहसास कराती रहती है ।
इंसानी दिमाग की सबसे अजीब बात यही है कि हम जिस चीज़ को पूरी तरह छू या देख नहीं सकते (जैसे स्पेस-टाइम का खिंचाव), उससे हमारा सबसे गहरा आदिम डर (Primitive Fear) जुड़ा हुआ है ।

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