ब्रह्मांड का अंत कैसे होगा? बिग फ्रीज़ से लेकर बिग रिप तक के 10 भयानक वैज्ञानिक सच ।

आज हम इस पोस्ट में ब्रह्मांड की विचित्र जानकारी जैसे क्वांटम, फिजिक्स, जेलीफिशब्लैक, होल्सडार्क, डार्क एनर्जी,  द बिग रिप, 30 \text, km का मतलब, 10^{100} वर्ष का मतलब। आदि की जानकारियां हमें इस पोस्ट के माध्यम से मिलेगी । 
साथ ही जानेंगे की हम 24 घंटे इस ब्रह्मांड के सफर में चल रहे होते हैं । इस पोस्ट को आप पूरा अंत तक जरूर पढ़ें आपको इस पोस्ट में ब्रह्मांड की जानकारी दी गई है जो सभी को जानना बहुत ही आवश्यक है ।

​​1 ब्रह्मांड का अंत कैसे होगा ? द बिग फ्रीज ।

हम जानते हैं कि ब्रह्मांड की शुरुआत बिग बैंग से हुई थी, लेकिन इसका अंत कैसे होगा ? खगोलविदों के अनुसार, इसका सबसे संभावित अंत द बिग फ्रीज या हीट डेथ है ।

​चूंकि डार्क एनर्जी के कारण ब्रह्मांड लगातार और तेज़ी से फैल रहा है, एक समय ऐसा आएगा जब आकाशगंगाएं एक-दूसरे से इतनी दूर चली जाएंगी कि रात का आसमान बिल्कुल काला हो जाएगा । नए तारों का बनना बंद हो जाएगा और पुराने तारे धीरे-धीरे बुझ जाएंगे या नष्ट हो जाएंगे ।
आखिर में, ब्लैक होल्स भी हॉकिंग रेडिएशन के कारण धीरे-धीरे वाष्पित होकर गायब हो जाएंगे । पूरे ब्रह्मांड का तापमान एब्सोल्यूट ज़ीरो (-273.15°C) के करीब पहुँच जाएगा । अंतरिक्ष में कोई ऊर्जा, कोई हलचल नहीं बचेगी । समय का कोई मतलब नहीं रह जाएगा, और ब्रह्मांड हमेशा के लिए एक शांत, ठंडी और अनंत समाधि में सो जाएगा ।

​2 अमरता का जैविक रहस्य अमर जेलीफिश । 

​प्रकृति में अमरता कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक हकीकत है । समुद्र में पाई जाने वाली एक छोटी सी जेलीफिश, जिसका वैज्ञानिक नाम टुरिटोप्सिस डोहर्नी है, तकनीकी रूप से कभी नहीं मरती ।
​जब यह जेलीफिश बूढ़ी हो जाती है, बीमार होती है, या किसी खतरे में होती है, तो यह एक जादुई प्रक्रिया शुरू करती है जिसे ट्रांसडिफरेंशिएशन कहते हैं । 
इसके तहत यह अपने अंगों और कोशिकाओं को वापस उनकी सबसे शुरुआती अवस्था में ले जाती है । यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई बूढ़ा इंसान अचानक वापस एक नवजात बच्चा बन जाए और अपनी जिंदगी फिर से शुरू करे । 
यह चक्र अंतहीन रूप से चल सकता है, जिससे यह जैविक रूप से अमर हो जाती है । वैज्ञानिक इसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं ताकि इंसानी बुढ़ापे को रोकने का कोई तरीका निकाला जा सके ।

​3 थ्योरी ऑफ एवरीथिंग विज्ञान का अधूरा सपना । 

​भौतिक विज्ञान आज दो अलग-अलग पटरियों पर चल रहा है, और यही वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा सिरदर्द है । 
​सापेक्षता का सिद्धांत यह आइंस्टीन का नियम है जो बड़ी चीज़ों पर लागू होता है-जैसे ग्रह, तारे और गुरुत्वाकर्षण ।
​क्वांटम मैकेनिक्स यह बहुत छोटी चीज़ों पर लागू होता है-जैसे परमाणु और इलेक्ट्रॉन ।

​अजीब बात यह है कि ये दोनों नियम एक दूसरे के बिल्कुल विरोधी हैं । जहाँ आइंस्टीन का नियम कहता है कि अंतरिक्ष का ताना-बाना चिकना है, वहीं क्वांटम विज्ञान कहता है कि छोटे स्तर पर सब कुछ हिंसक और अराजक है । 
पिछले 100 सालों से वैज्ञानिक एक ऐसे इकलौते गणितीय समीकरण की तलाश में हैं जो इन दोनों को एक साथ जोड़ सके । इसे थ्योरी ऑफ एवरीथिंग कहा जाता है। जिस दिन यह फॉर्मूला मिल गया, इंसान ब्रह्मांड के हर एक रहस्य को गणित से हल कर सकेगा ।
4 इंफॉर्मेशन पैराडॉक्स क्या ब्लैक होल जानकारी को मिटा देता है ?

​क्वांटम फिजिक्स का एक बुनियादी नियम है ब्रह्मांड से जानकारी को कभी पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता। 
यदि आप एक किताब को जला भी दें, तो उसके धुएं और राख के परमाणुओं को यदि दोबारा उसी क्रम में जोड़ा जाए, तो किताब वापस बनाई जा सकती है यानी जानकारी बची रहती है ।
​लेकिन जब कोई चीज़ ब्लैक होल में गिरती है, और स्टीफन हॉकिंग की थ्योरी के अनुसार जब वह ब्लैक होल धीरे-धीरे वाष्पित होकर पूरी तरह गायब हो जाता है, तो उसके अंदर गई चीज़ों की जानकारी का क्या होता है ? 
क्या वह हमेशा के लिए नष्ट हो जाती है ?
अगर वह नष्ट हो जाती है, तो क्वांटम फिजिक्स का सबसे बुनियादी नियम टूट जाता है । और अगर वह बची रहती है, तो आइंस्टीन के नियम गलत साबित होते हैं । इसे ब्लैक होल इंफॉर्मेशन पैराडॉक्स कहते हैं, जिसने भौतिक विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी बहस छेड़ रखी है ।

5 ​एक अंतिम दार्शनिक सच । 

 आप इस समय जिस कुर्सी या ज़मीन पर बैठे हैं, वह प्रति सेकंड 30 \text (10^(220) किलोमीटर, 1 के आगे 220 शून्य) (किलोमीटर) की रफ्तार से सूर्य के चक्कर लगा रही है । 

हमारा सूर्य 220 \text (10^(220) किलोमीटर, 1 के आगे 220 शून्य) (किलोमीटर प्रति सेकंड) की रफ्तार से आकाशगंगा के चक्कर काट रहा है । यानी आप स्थिर बैठे हुए भी ब्रह्मांड में हर सेकंड लाखों किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं ।

6 ब्रह्मांड का अंत होने का समय । 

100 अरब वर्ष बाद हमारी आकाशगंगा और एंड्रोमेडा आकाशगंगा आपस में टकराकर एक हो जाएंगी। दूर की आकाशगंगाएं हमसे इतनी दूर चली जाएंगी कि वे दिखना बंद हो जाएंगी ।
​100 ट्रिलियन (लाख करोड़) वर्ष बाद ब्रह्मांड में नए तारों का बनना पूरी तरह बंद हो जाएगा। आखिरी बचे हुए तारे भी धीरे-धीरे बुझ जाएंगे ।

10^(40) वर्ष का क्या मतलब है ?

​10^(40) (1 के आगे 40 सन्ये) वर्ष बाद ब्रह्मांड के सारे परमाणु टूटने लगेंगे । इसे प्रोटॉन क्षय कहते हैं । अब ब्रह्मांड में सिर्फ ब्लैक होल बचेंगे ।

10^(100) वर्ष का क्या मतलब है ?

​10^(100) (1 के आगे 100 सन्ये) वर्ष बाद ब्लैक होल भी हॉकिंग रेडिएशन के कारण धीरे-धीरे वाष्पित होकर गायब हो जाएंगे । इसके बाद सिर्फ पूर्ण अंधकार और अनंत ठंडक बचेगी ।
​10^(40) वर्ष, बाद एक ऐसी अकल्पनीय अवधि, जिसे अगर अंकों में लिखें तो 1 के आगे 40 शून्य लगाने पड़ेंगे । इस समय तक ब्रह्मांड के सारे परमाणु नष्ट हो जाएंगे ।

​10^(40) वर्ष, बाद एक ऐसी अकल्पनीय अवधि, जिसे अगर अंकों में लिखें तो 1 के आगे 40 शून्य लगाने पड़ेंगे । इस समय तक ब्रह्मांड के सारे परमाणु नष्ट हो जाएंगे ।
यह संख्या इतनी विशाल है कि इसे शब्दों में लिखना या पुकारना नामुमकिन है । 
इसे विज्ञान की भाषा में गूगोल (Googol) कहा जाता है (इसी शब्द से प्रभावित होकर Google कंपनी का नाम पड़ा था) । 
​यह समय कितना बड़ा है, इसका अंदाज़ा आप ऐसे लगा सकते हैं कि हमारे पूरे ब्रह्मांड में जितने कुल परमाणु हैं, उनकी संख्या भी केवल 10^(80) के आसपास है ।
​यानी पूरे ब्रह्मांड के कणों को भी गिन लें, तो भी 10^(100) उससे कहीं बड़ी संख्या है । 
इतने वर्षों के बाद ब्रह्मांड के आखिरी बचे हुए महाविशाल ब्लैक होल भी पूरी तरह से वाष्पित (गायब) हो जाएंगे और सब कुछ खत्म हो जाएगा ।

7 डार्क एनर्जी का रहस्य । 

​बिग फ्रीज़ के पीछे का सबसे बड़ा विलेन डार्क एनर्जी है । यह एक ऐसी रहस्यमयी ताकत है जो ब्रह्मांड को लगातार दूर धकेल रही है ।
​आप पोस्ट में समझा सकते हैं कि जैसे-जैसे ब्रह्मांड फैलता है, डार्क एनर्जी कम नहीं होती, बल्कि और शक्तिशाली होती जाती है । 
यह गुरुत्वाकर्षण को हरा देती है, जिससे आकाशगंगाएं एक-दूसरे के पास नहीं आ पातीं ।

8 द बिग रिप सिद्धांत, ब्रह्मांड का फटना । 

​अगर डार्क एनर्जी की ताकत बहुत ज़्यादा बढ़ गई, तो बिग फ्रीज़ की जगह द बिग रिप होगा । 
​इसमें ब्रह्मांड इतनी तेजी से फैलेगा कि सिर्फ आकाशगंगाएं ही दूर नहीं होंगी, बल्कि अंत में ग्रह, तारे, इंसान और यहाँ तक कि परमाणु भी बीच से फट जाएंगे । सब कुछ के चिथड़े उड़ जाएंगे ।

9 द बिग क्रंच सिद्धांत, सब कुछ वापस सिकुड़ना । 

​यह बिग फ्रीज का ठीक उल्टा है ।
​अगर किसी वजह से डार्क एनर्जी कमज़ोर पड़ गई और गुरुत्वाकर्षण जीत गया, तो ब्रह्मांड का फैलना रुक जाएगा ।
​इसके बाद सब कुछ वापस अंदर की तरफ सिकुड़ने लगेगा । सारी आकाशगंगाएं, तारे और ब्लैक होल आपस में टकराएंगे और अंत में पूरा ब्रह्मांड वापस एक छोटे से बिंदु (सिंगुलैरिटी) में समा जाएगा, जहाँ से बिग बैंग की शुरुआत हुई थी ।

10 द बिग बाउंस, एक नई शुरुआत ।

​कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग क्रंच (सिकुड़ने) के बाद ब्रह्मांड पूरी तरह खत्म नहीं होगा । जब सब कुछ एक बिंदु पर सिमट जाएगा, तो वहां फिर से एक नया बिग बैंग होगा और एक नया ब्रह्मांड जनम लेगा। यानी अंत ही एक नई शुरुआत है । 

आपको ब्रह्मांड की यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट में बॉक्स में जरूर बताएं यहां तक पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । 

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