प्रकृति क्या है समझने की कोशिश करें।



प्रकृति उन सभी चीज़ों को संदर्भित करती है जो प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं और मनुष्यों द्वारा नहीं बनाई गई हैं।
 जैसे पहाड़, पेड़, नदियाँ, जानवर और सभी भौतिक घटनाएँ और प्रक्रियाएँ प्रकृति कहलाती हैं।
 यह भौतिक जगत है, जिसमें जीवन भी शामिल है, और यह ब्रह्मांड का एक अंतर्निहित हिस्सा जिसे हम प्रकृति कहते है।
इसकी सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य बन जाता हैं।

अब हंता वायरस का मामला सामने आया है चीन में कोरोना वायरस के मचने के बाद यूनान प्रांत में हंता वायरस से मौत की खबर सामने आई है।

इन हालातों को देखते हुए हमें एक नजरिया मिला है जो आपके सामने प्रस्तुत कर रहा है कृपया इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें आपको पसंद आए तो ग्रहण करें, पसंद न आए तो बात न करें लेकिन एक बार जरूर पढ़ें।

और एक बात हम आपको पहले ही स्पष्ट कर देना चाहते हैं, जिससे आप को समझने कि समस्या ना हो
  कभी-कभी आपको पता चला होगा,
या वो बातें नोट की होगी जो आपके साथ हो चुकी होंगी या हो गई होंगी।
    वह यह है, कि आप जब भी किसी छोटे को डाटते हो या किसी कमजोर व्यक्ति को डराते हो तो आप को बहुत बड़ा आनंद मिलेगा बस दोस्तों हम यही समझाना चाहते हैं।
   जब तुमने उसे डराया वह डरा उसकी ऊर्जा आपमें समाहित होगी आपको मालूम हो सकता है, ठीक इसी तरह हम किसी भी जानवर को अलग कर देते हैं तो लाजमी है कि उसकी ऊर्जा हमारे पास निश्चित रूप से विकसित होगी इसी को देखते हुए हमने यह पोस्ट तैयार किया है।

यही प्रकृति है। समझने कोशिश करनी है यह ऊर्जा भी प्रकृति से ही है।

    हमारा दृष्टिकोण मिला हुआ है, जो लोग अधिक नकारात्मक कर्म करते हैं उनके अन्य लोगों की मन की शक्ति अधिक होती है, या जो भगवान की साधना करते हैं।
            नोट-आप माइंड पावर बढ़ाने के लिए काम ना करें पोस्ट को पढ़ें।

    अब बात आती है चीन की, दूसरे देशों से सबसे ज्यादा घिनोने काम करता है चीन, यानी सबसे ज्यादा प्रकृति के खिलाफ जाने वाला देश है चीन नतीजा आपके सामने है।
     चीन से एक ही तरह के वायरस निकल कर सामने आ रहे हैं प्रकृति अपना संतुलन बनाती हैं, यह हम इंसानों के बस में नहीं है।
       उदाहरण
           के लिए जैसे आपने किसी पेड़-पौधे या अन्य बीज बोया या तो वह बीज लग जाएगा या मिट्टी में मिल जाएगा आपको फिर से बीज बोया और वह लग गया।
       हमारा अवलोकन का उद्देश्य यह है कि आप एक दो बार बुरे कर्म किए, मगर आप बार-बार बुरे कर्म करोगे तो आपको इसकी कीमत चुकानी ही पड़ेगी।
 यहां सृष्टि प्रकृति हमारी नहीं है, हम यहां मेहमानों की तरह है। यह समझते हैं कि किराए के मकान में रहते हैं। हाँ अगर हम सृष्टि के अधीन हैं तो सृष्टि हमारी देवी के साथ है, अन्यथा हमें इसकी कीमत चुकानी ही पड़ेगी आप चाहे तो किसी भी भगवान के पास जाइये हमें माफ नहीं किया जाएगा। 
       इसलिए हमेशा अपने कर्म अच्छे रखे और प्रकृति के आदर्श का पालन करें।
       किसी भी जीव को मारने की बर्बादी हमें प्रकृति नहीं देती है और हम हैं कि किसी भी जानवर को खा रहे हैं, ऐसे में अगर हम प्रकृति की मांग करते हैं तो किसी की संतान को खाओगे तो आपको पता चलेगा कि क्या होता है।
       इसलिए मैंने पिछली पोस्ट में बताया था कि हमेशा सात्विकक्रम करें और मांसाहार को छोड़ दें अपनी जीभ के स्वाद में अंधे लोग क्या-क्या खा रहे हैं, उन्हें यह नहीं पता कि इसका परिणाम क्या होगा अगर किसी भाई को प्रकृति के बारे में नहीं मालूम था तो वह कृपया करें इस पोस्ट को पढ़ने के बाद प्रकृति के साथ आने की चेष्टा करें और अपने परमात्मा (अदृश्य शक्ति) से प्रार्थना करें कि हमें माफ कर दे हम आगे से आपकी सृष्टि की हानि नहीं करेंगे। आप हमें बुद्धि दे ताकि हम हमारी रक्षा करें और सृष्टि की रक्षा भी करते रहें।

        साथ ही साफ सफाई का ध्यान रखें हर जीव जंतु से प्यार करें यह न सोचें कि इसे मार कर खा लूं इंसान को मांस खाना सृष्टि में नहीं है सोचे ही नहीं।

    हमारें दृष्टिकोण से जो लोग कुकर्म करते हैं उनका दिमाग एक बार ज्यादा कार्य करता है क्योंकि वह सृष्टि से अलग हो जाते हैं जब अलग होता है तब उसे बहुत आनंद मिलता है मगर परिणाम जहर जैसा निकलता है।
         जब परिणाम आता है तो बहुत सारे कांटो का सामना करना पड़ता है जो लोग सृष्टि के खिलाफ गए उसे तो सृष्टि की सजा मिलेगी ही साथ में औरों को भी भोगना पड़ सकता है। परिणाम आपके सामने है। कोरोना वायरस, हंता वायरस आदि

             यह पोस्ट पढ़कर आपको बुरा लगा हो तो हमें क्षमा करें। अगर आपको अच्छा ना लगा हो तो आप हमारी बातों पर गौर ना करें।
              हमें यह दृष्टिकोण पहले ही प्राप्त था मगर हमने इसे सार्वजनिक नहीं किया क्योंकि किसी को बुरा भी लग सकता है। मगर हालात देखते हुए हमने यह पोस्ट सार्वजनिक करना पड़ा आपकी भावनाओं की हम कदर करते हैं, आपकी भावनाओं से खिलवाड़ करने की हमारी सोच नहीं है। हमारा किसी भाई को ठेस पहुंचाने का कोई मकसद नहीं है।
ना ही किसी देश, जाति किसी को भी ठेस पहुंचाने का मकसद नहीं।
      हमने इस पोस्ट के जरिए सृष्टि के खिलाफ न जाने के बारे में बताया है, आपको अच्छा लगा तो ग्रहण कर सकते हैं, नहीं अच्छा लगा तो कोई बात नहीं है।
  मेरा नाम ओमप्रकाश शर्मा है, अगर पोस्ट पसंद आया तो कृपया कर इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब करें ताकि आपको हर पोस्ट की नोटिफिकेशन और नई नई जानकारियां मिलती रहे। धन्यवाद

Post a Comment

0 Comments